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बोकारो वन भूमि घोटाला: प्रथम दृष्टया भूमि दस्तावेजों में हुई गंभीर हेराफेरी- झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो जमीन घोटाला मामले में  2 आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है. बोकारो जिले के करीब 95.65 एकड़ संरक्षित वन भूमि के कथित भूमि घोटाले से जुड़ा है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया है कि रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट होता है कि भूमि से जुड़े दस्तावेजों में गंभीर स्तर पर हेराफेरी की गई है.
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Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो जमीन घोटाला मामले में  2 आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है. बोकारो जिले के करीब 95.65 एकड़ संरक्षित वन भूमि के कथित भूमि घोटाले से जुड़ा है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया है कि रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट होता है कि भूमि से जुड़े दस्तावेजों में गंभीर स्तर पर हेराफेरी की गई है.

 

9 साल के उम्र में जमीन खरीदना असंभव

कोर्ट ने पूछा कि जिस व्यक्ति के नाम पर साल 1933 की नीलामी बताई जा रही है, उस समय उसकी उम्र मात्र 9 वर्ष थी.  ऐसे में इतनी बड़ी जमीन खरीदना असंभव प्रतीत होता है. हाईकोर्ट ने यह भी माना कि आरोपी शैलेश कुमार सिंह और विमल कुमार अग्रवाल सरकारी वन भूमि को निजी लाभ के लिए हथियाने की साजिश में शामिल होने के गंभीर आरोप हैं. हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की कोर्ट ने मामले की सुनवाई की.

 

क्या है मामला 

यह मामला CID थाना कांड संख्या 04/2025 से संबंधित है, जिसमें भारतीय दंड संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है. प्राथमिकी के अनुसार, बोकारो के मौजा तेतुलिया क्षेत्र की संरक्षित वन भूमि पर कुछ लोगों द्वारा फर्जी दस्तावेजों के जरिए मालिकाना हक जताने का प्रयास किया गया. आरोप है कि वर्ष 1933 का एक नीलामी बिक्री प्रमाण पत्र तैयार कर भूमि का म्यूटेशन कराया गया. उसके बाद उस जमीन को निजी कंपनियों के हाथों बेच दिया गया. जांच में यह भी सामने आया कि इस घोटाले में कुछ सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत रही. इस मामले में चास के तत्कालीन अंचल अधिकारी को सेवा से बर्खास्त भी किया गया है.

 

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