Bokaro : चास प्रखंड के रीतुडीह पंचायत में बिजली लोगों के लिए खतरे की वजह बनती जा रही है. जबकि बिजली लोगों के घरों को रोशन करने के लिए होती है. यहां कई जगहों पर बिजली के नंगे तार मकानों की छतों के ऊपर से गुजर रहे हैं. वहीं कुछ परिवार बांस, पेड़ और छतों का सहारा लेकर अपने घरों तक बिजली पहुंचाने को मजबूर हैं.
दरअसल विभाग ने पोल लगाने की जहमत नहीं उठाई, जिससे सबसे चिंताजनक स्थिति उत्क्रमित मध्य विद्यालय सिवनडीह की है. स्कूल भवन के ऊपर से गुजर रहे बिजली के तारों ने बच्चों और शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चे अक्सर खेलते-खेलते स्कूल की छत पर चले जाते हैं. ऐसे में जरा सी चूक किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है. जबकि ग्रामीणों नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान करते हैं, लेकिन आज तक उनके घरों तक सुरक्षित ढंग से बिजली पहुंचाने के लिए पर्याप्त पोल और तार की व्यवस्था नहीं की गई. मजबूरी में लोगों ने अपने स्तर पर अस्थायी इंतजाम कर बिजली कनेक्शन लिया हुआ है.
ये हाल सिर्फ एक जगह की नहीं है बल्कि रीतुडीह, लेबर हाउसिंग कॉलोनी, झोपड़ी कॉलोनी और आसपास के कई इलाकों में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है. जगह-जगह लटकते तार और असुरक्षित कनेक्शन लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो किसी दिन यह लापरवाही बड़े हादसे का रूप ले सकती है. फिलहाल रीतुडीह के लोग रोशनी तो पा रहे हैं, लेकिन उन्हें डर है कि उनके घर के चिराग न बुझ जाए. हर पल एक अनहोनी के डर के साए में जीने को मजबूर है.
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