- मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित
- मेडिकल बोर्ड की निगरानी में होगा शव का पोस्टमार्टम
Bokaro : बोकारो सदर अस्पताल में फिजियोथेरेपिस्ट बीरेंद्र महतो की आत्महत्या मामले ने नया मोड़ ले लिया है. परिजनों ने शव उठाने व पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया है. मृतक की पत्नी उर्मिला देवी ने कहा कि मेरे पति ने आत्महत्या नहीं की है, उनकी हत्या हुई है. हत्या के बाद शव को फंदे पर लटका कर आत्महत्या का रूप दिया गया है. परिजनों ने आश्रित को नौकरी व 50 लाख रुपए मुआवजा की मांग की है.
परिजनों के विरोध के चलते सदर अस्पताल में ओपीडी सेवा ठप रही. इधर, मामले की जांच एसआईटी कराने की बात कही गई है. शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है. हंगामे को देखते हुए अस्पताल में पुलिस के वरीय अधिकारी व मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है.
घटना की सूचना पर गोमिया के पूर्व विधायक डॉ लम्बोदर महतो समेत कई दलों के नेता अस्पताल पहुंचे और परिजनों से मुलाकात की. दूसरी ओर त्रिपक्षीय वार्ता भी शुरू हो गई है. सिविल सर्जन डॉ अभय भूषण प्रसाद ने कहा कि आश्रित को गैर सरकारी नौकरी दी जाएगी, लेकिन 50 लाख मुआवजा राशि देने का अधिकार उन्हें नहीं है.
ज्ञात हो कि फिजियोथेरेपिस्ट बीरेंद्र महतो गुरुवार की देर रात सदर अस्पताल पहुंचा और उसने अपने फिजियोथेरेपी कमरे में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. उसका शव फंदे से झूलते हुए बरामद किया गया. पुलिस अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों को खंगालने में जुटी है. बताया जा रहा है कि घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, लेकिन पुलिस ने उसे गुप्त रखा है.
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