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बोकारो की खौफनाक कहानीः युवती के गायब होने व नरकंकाल की बरामदगी, HC की मॉनिटरिंग

  • वर्ष 2020 में भी बोकारो से लापता युवती का साल 2021 में हुआ था मर्डर
  • एसपी से लेकर डीजीपी तक की कोर्ट में लगी हाजिरी
  • बोकारो पुलिस ने पीड़ित पक्ष की ही कर दी पिटाई, वृद्ध रिश्तेदार को भी उठाया
  • हाईकोर्ट ने CBI जांच कराने की दे चुका है चेतावनी
  • युवती का अब कंकाल बरामद कर लिए जाने का दावा

Ranchi: आखिरकार जुलाई 2025 में बोकारो से गायब युवती का मामला सुलझा लेने का दावा बोकारो पुलिस कर रही है. पुलिस ने युवती का कंकाल बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. यह मामला हाईकोर्ट के संज्ञान में आने के बाद हाईकोर्ट को बोकारो से ही वर्ष 2020 में लापता एक अन्य युवती के गायब होने का मामला याद आया. उस मामले में हाईकोर्ट ने गंभीरता दिखाई थी.

 

लेकिन जांच को तेज करने का आदेश देने के बाद कोर्ट के संज्ञान में यह बात युवती का वर्ष 2021 में मर्डर हो चुका है. यह बात हाईकोर्ट की खंडपीठ को एक तीर की तरह चुभ रही थी. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने इसकी चर्चा भी इस मामले की सुनवाई के दौरान की थी. लेकिन इस बार भी 18 वर्षीय युवती के लापता होने का मामला फिर इस स्थिति में पहुंचा और युवती का कंकाल पुलिस ने बरामद किया है.

 

हाईकोर्ट ने शुरू की मॉनिटरिंग 

27 फरवरी 2026 का वह दिन था, जब 18 वर्षीय युवती मामले में हाईकोर्ट ने मॉनिटरिंग शुरू की. युवती की मां ने हाईकोर्ट में हेवियस कॉपस दाखिल की थी. सख्त रवैया अपनाते हुए उसी दिन एसपी बोकारो को वर्चुअल तलब किया था. उनसे पूछा था कि 7 माह से अधिक समय बीतने के बाद युवती के बरामदगी पर क्या कदम उठाए गए ?  और युवती कब तक बरामद कर ली जाएगी? 


एसपी ने एक संदिग्ध के नार्को टेस्ट दुबारा करने और युवती की बरामदगी को लेकर बोकारो और आसपास के तीन-चार जगह पर छापेमारी करने की. उसके बाद पुलिस ने अपनी रटी रटाई बात ही कोर्ट के समक्ष रखी थी. 

 

क्यों नहीं केस CBI को सौंप जाए ?

अब अगली सुनवाई 19 मार्च की बात करते हैं. उस दिन भी बोकारो पुलिस ने संदिग्ध के नारको टेस्ट कराने की बातें दुहराए थी.  लेकिन इस बार हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए बोकारो पुलिस की अनुसंधान में लापरवाही पर मौखिक रूप से कहा था कि क्यों नहीं इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया जाए? क्योंकि वर्ष 2020 में भी एक अन्य गायब लापता युवती के मामले में पुलिस की असफलता दिखी थी और बाद में उसकी लाश बरामद हुई थी. 

 

FIR दर्ज होने में लगा 10 दिन का समय

20 मार्च को जब इस मामले की सुनवाई चली तो कोर्ट इस बात से हैरान था कि युवती के परिजन द्वारा सन्हा दर्ज होने के बाद FIR दर्ज होने में 10 दिनों का समय बोकारो पुलिस ने लिया था. हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए बोकारो एसपी को फिर तलब किया. कोर्ट ने एसपी से पूछा था कि 10 दिन देरी से FIR दर्ज होने दोषी संबंधित पुलिस स्टेशन के थाना इंचार्ज के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई. 


साथ ही उन्हें केस डायरी के साथ इस केस की अपडेट अनुसंधान की स्थिति प्रस्तुत करने को कहा था. कोर्ट ने फिर चेतावनी दी थी कि अगर अनुसंधान सही तरीके से नहीं होने के बाद सामने आती है तो इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी जा सकती है. 

 

तीसरी बार बनाया संदिग्ध के नार्को टेस्ट का बहाना 

23 मार्च को सुनवाई के दौरान बोकारो पुलिस ने तीसरी बार भी एक संदिग्ध के नार्को टेस्ट का बहाना बनाया था. उस दिन भी SP बोकारो कोर्ट में  हाजिर हुए थे. कोर्ट ने पूछा था कि जब युवती के परिजन ने 24 जुलाई 2025 को सनहा दर्ज किया गया था तो प्राथमिकी दर्ज करने में 4 अगस्त 2025 का समय क्यों लगा?

 

SP ने बताया कि मामले के मुख्य संदिग्ध का नार्को टेस्ट गुजरात में किया जाएगा, इसकी अनुमति कोर्ट से ले ली गई है. उनकी ओर से बताया गया कि मामले में बोकारो के पिंडराजोड़ा थाना  इंचार्ज के खिलाफ सो काज  नोटिस जारी किया गया है.  कोर्ट ने  बोकारो पुलिस से संदिग्ध के नार्को टेस्ट और केस की स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी. 

 

पीड़ित के परिजन की पुलिस ने कर दी पिटाई

7 अप्रैल को हुई सुनवाई में कोर्ट के समक्ष यह बात आई की बोकारो पुलिस ने पीड़ित परिवार के एक रिश्तेदार (चाचा ससुर) की बेरहमी से पिटाई कर दी है. जिसे गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने उसी दिन हुई दूसरी बार सुनवाई में DGP को दोपहर 3:30 बजे तलब किया था. 

 

बोकारो पुलिस के खिलाफ गंभीर टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने DGP से पूछा था कि याचिकाकर्ता के रिश्तेदार को कस्टडी में लेकर पिटाई क्यों की गई. वह गंभीर रूप से रांची के निजी क्लीनिक में इलाजरत है. पुलिस की बेरहमी पिटाई से उनके सिर और शरीर में गंभीर चोट आई है. DGP से इस संदर्भ में कोर्ट ने रिपोर्ट भी मांगी.

 

याचिकाकर्ता के परिजन को भी पुलिस ने उठाया 

9 अप्रैल को ही सुनवाई में कोर्ट के समक्ष यह बात आई कि बोकारो पुलिस ने याचिकाकर्ता के एक और रिश्तेदार को उठा लिया है. इसके बाद उस दिन दूसरी बार हुई सुनवाई में कोर्ट ने DGP को फिर हाजिर होने को कहा. दोपहर 12 बजे वर्चुअल रूप से हाजिर हुई थी. कोर्ट ने उनसे कहा था कि एसपी बोकारो ज्यूडिशियरी को चैलेंज कर रहे हैं. 


DGP को बताया गया कि याचिकाकर्ता के वृद्ध रिश्तेदार पुलिस उठा कर ले गई है. जबकि कोर्ट ने पिछली सुनवाई में स्पष्ट कहा था कि अगर याचिकाकर्ता को या उनके किसी रिश्तेदारों बोकारो पुलिस द्वारा प्रताड़ित किया जाता है तो उसकी जिम्मेदारी बोकारो एसपी पर होगी.

 

मारपीट मामले में वन मैन कमिटी बनी 

DGP ने कोर्ट को बताया था कि मारपीट मामले में वन मैन कमिटी बनाई गई है. इसकी रिपोर्ट देने के लिए उन्होंने कोर्ट से समय की मांग की थी. उन्होंने कोर्ट को बताया था कि पिंडराजोड़ा थाना प्रभारी को उस थाना से हटा दिया गया है, इस मामले से संबंधित मामले अनुसंधान नहीं करेंगे. 


कोर्ट ने DGP को याचिकाकर्ता के चाचा ससुर की पिटाई मामले में कमिटी की सीलबंद रिपोर्ट सौंपने और लापता युवती  को खोजने में तेजी लाने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल निर्धारित की है. कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार की अधिवक्ता को निर्देश दिया कि वह पुलिस की पिटाई में घायल याचिकाकर्ता के चाचा ससुर का इलाज दीपा टोली सेना अस्पताल में करने की व्यवस्था कराए. 

 

पुलिस को चकमा देकर भाग निकला संदिग्ध

कोर्ट को प्रार्थी की ओर से बताया गया था कि युवती 31 जुलाई 2025 से लापता है. मामले को लेकर बोकारो के पिंडराजोड़ा थाना में कांड संख्या 147 /2025 दर्ज किया गया था. युवती के परिजन को 11 दिसंबर 2025 को मोबाइल पर एक कॉल आया था, जिसमें कहा गया था उनकी लड़की पुणे में है. 


इसके बाद पुलिस दल ने फोन करने वाले युवक को दबोच लिया था. थाने में पूछताछ के दौरान उसने पुलिस को बताया कि युवती उसके दोस्त के पास पुणे में है. पुलिस की टीम युवती के पिता के साथ उस लड़के को लेकर ट्रेन से पुणे जा रही थी, इसी दौरान वह उन्हें चकमा देकर भाग गया. पुलिस अब तक युवती को नहीं ढूंढ सकी है.

 

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