Patna: पटना हाई कोर्ट ने शराब के सेवन की पुष्टि के लिए ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट को पर्याप्त नहीं माना. कोर्ट ने 10 साल पुराने एक मामले की सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की. कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश का हवाला देते हुए कहा कि किसी ने शराब का सेवन किया है, इसकी पुष्टि के लिए उसके रक्त और पेशाब की भी जांच होनी चाहिए.
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पटना हाईकोर्ट ने शराबबंदी से जुड़े एक 10 साल पुराने मामले की सुनवाई करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी स्थित स्पष्ट की है. कोर्ट ने साफ कहा कि सिर्फ ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट को किसी व्यक्ति द्वारा शराब का सेवन का निर्णालय प्रमाण नहीं माना जा सकता है. इस टेस्ट के वैज्ञानिक आधार पर कोर्ट ने सवाल उठाए हैं.
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति ने शराब का सेवन किया है या नहीं, इसे पूरी तरह साबित करने के लिए उसके रक्त और मूत्र के सैंपल की जांच होनी चाहिए. इन दोनों जांच के बिना आरोप को अंतिम नहीं माना जा सकता है.
मामला 24 नवंबर 2016 का है, जब बीएमपी 6 के पास तैनात जवान मनोज ठाकुर को नशे की हालत में हंगामा करने के आरोप में पकड़ा गया था. उस समय उत्पाद विभाग की टीम ने उनकी ब्रेथ एनालाइजर जांच की थी, जिसमें उसके शराब पीने की पुष्टि दिखाई गई थी.
पकड़े जाने के बाद जवान मनोज ठाकुर के खिलाफ स्थानीय थाना केस दर्ज हुआ था. निचली अदालत से उन्हें कोई राहत नहीं मिल सकी थी.
निचली अदालत से राहत नहीं मिलने पर मनोज से पटना हाई कोर्ट में अपील की. कोर्ट ने दोहराया कि ब्रेथ एनालाइजर रिपोर्ट किसी भी व्यक्ति द्वारा शराब पीने का अंतिम और अचूक सबूत नहीं हो सकती.
कोर्ट ने कहा कि ब्रेथ एनालाइजर के साथ-साथ रक्त और मूत्र सैंपल की जांच रिपोर्ट मैच होने पर सजा की निर्धारण होना चाहिए. कोर्ट ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के अभाव में जवान को राहत दे दी.
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