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अपराधियों से सांठगांठ के आरोप में गया सेंट्रल जेल का डिप्टी सुपरिटेंडेंट निलंबित

गया सेंट्रल जेल में पदस्थापित डिप्टी सुपरिटेंडेंट सुदर्शन प्रसाद सिंह को निलंबित कर दिया गया है. गृह एवं कारा विभाग ने यह कार्रवाई उनके खिलाफ मिली गंभीर शिकायतों के आधार पर की है.  निलंबन के दौरान सुदर्शन प्रसाद सिंह का मुख्यालय खुदीराम बोस केंद्रीय कारा, मुजफ्फरपुर रहेगा. इस अवधि में उन्हें विभाग की अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने की इजाजत नहीं होगी.
 

Lagatar Desk :  गया सेंट्रल जेल में पदस्थापित डिप्टी सुपरिटेंडेंट सुदर्शन प्रसाद सिंह को निलंबित कर दिया गया है. गृह एवं कारा विभाग ने यह कार्रवाई उनके खिलाफ मिली गंभीर शिकायतों के आधार पर की है.  निलंबन के दौरान सुदर्शन प्रसाद सिंह का मुख्यालय खुदीराम बोस केंद्रीय कारा, मुजफ्फरपुर रहेगा. इस अवधि में उन्हें विभाग की अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने की इजाजत नहीं होगी. 

 

गृह विभाग के अनुसार, सुदर्शन प्रसाद सिंह पर जेल के नियमों की अनदेखी करने, ड्यूटी में लापरवाही बरतने और अपराधियों से मिलीभगत जैसे गंभीर आरोप हैं. शुरुआती जांच में शिकायतों को गंभीर मानते हुए उन्हें निलंबित किया गया है. विभाग का कहना है कि उनके कार्यकाल के दौरान जेल की सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हुई.

 

जानकारी के मुताबिक, 16 जुलाई को जेल में तलाशी के दौरान बंदी रमेश यादव उर्फ सुमन यादव के पास से गांजा बरामद हुआ था. जेल अधीक्षक ने आरोपी कैदी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया था, लेकिन आरोप है कि डिप्टी सुपरिटेंडेंट ने इस आदेश का पालन नहीं किया. विभाग ने इसे गंभीर लापरवाही माना है.

 

जांच में यह भी सामने आया कि वे कई बार बाहरी लोगों और कैदियों के परिजनों को बिना गेट रजिस्टर में नाम दर्ज कराए अपने कार्यालय में बुलाकर मुलाकात कराते थे. बताया गया है कि जेल अधीक्षक ने उन्हें कई बार ऐसा नहीं करने की चेतावनी दी थी, लेकिन उन्होंने निर्देशों का पालन नहीं किया.

 

इसके अलावा, जेल के कई कर्मचारियों ने भी उनके खिलाफ शिकायत की है. आरोप है कि जांच के बिना किसी बाहरी व्यक्ति को अंदर जाने से रोकने पर वे कर्मचारियों से अभद्र भाषा में बात करते थे और उन पर दबाव बनाते थे.  सुदर्शन प्रसाद सिंह पर कुछ कैदियों के साथ बिना वजह मारपीट करने के आरोप भी लगे हैं.

 

इन सभी मामलों की विभागीय जांच की जाएगी और संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जाएंगे. गृह विभाग ने कहा है कि यदि जांच में सभी आरोप सही पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ सेवा से बर्खास्तगी सहित कड़ी कार्रवाई की जा सकती है. 

 

 

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