Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने बुंडू सब-डिविजन कोर्ट को सिविल कोर्ट की तरह बनाने को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई की. बुंडू सब-डिविजन कोर्ट में सुविधा की बढ़ोतरी नहीं होने पर और संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं कराने सहित इससे जुड़ी बैठक के बेनतीजा रहने पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई. चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने इसे लाल फीताशाही का उदाहरण बताया.
खंडपीठ को बताया गया कि बुंडू सब डिविजनल कोर्ट को सिविल कोर्ट की तरह बेहतर बनाने के लिए हाईकोर्ट के निर्देश पर मुख्य सचिव ने एक कमेटी बनाई थी. कमेटी ने पाया कि इसके आधारभूत संरचना के संबंध में जो प्लानिंग की गई थी. वह करीब 16-17 साल पुराना है. कमेटी ने सुझाव दिया कि इसमें बदलाव करना और अपडेट करना जरूरी है.
इस संबंध में विधिक डिपार्टमेंट से राय लेना आवश्यक समझा गया. विधिक डिपार्टमेंट से अपडेट आधारभूत संरचना निर्माण पर जानकारी मांगी गई. लॉ डिपार्टमेंट की ओर से इस संबंध में हाईकोर्ट के रजिस्टार जनरल से जानकारी मांगी गई कि, क्या-क्या नई चीज की आवश्यकता होगी और कैसे बेहतर संरचना बनेगी.
हाईकोर्ट के रजिस्टार जनरल की ओर से इन विषयों पर जुडिशियल कमिश्नर रांची से जानकारी मांगी. अपर महाधिवक्ता आशुतोष आनंद ने कोर्ट को बताया कि जुडिशियल कमिश्नर रांची से इस बारे में कोई जानकारी अभी प्राप्त नहीं हुई है. जिसके चलते इस संबंध हुई बैठक बेनतीजा रही है.
अपर महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि अगली सुनवाई में मुख्य सचिव, रांची डीसी, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल, लॉ सेक्रेट्री, रांची जुडिशियल कमिश्नर सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहेंगे.
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