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NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होना युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय: सतीश पौल मुंजनी

Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के उपाध्यक्ष सह मीडिया चेयरमैन सतीश पौल मुंजनी ने NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने की घटना को लेकर बयान जारी किया है. बयान में पौल ने देश के लाखों युवाओं के भविष्य के साथ गंभीर अन्याय और शिक्षा व्यवस्था पर गहरा आघात बताया है. उन्होंने कहा कि वर्षों की मेहनत, त्याग और कठिन परिश्रम के बाद परीक्षा में शामिल हुए छात्रों को बदले में अव्यवस्था, अनिश्चितता और मानसिक प्रताड़ना मिली है.

 

मुंजनी ने कहा कि देशभर के लाखों छात्र-छात्राओं ने दिन-रात मेहनत कर इस परीक्षा की तैयारी की थी. किसी पिता ने बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज लिया, तो किसी मां ने अपने सपनों और जरूरतों का त्याग कर बच्चों की तैयारी सुनिश्चित की. लेकिन बार-बार होने वाली गड़बड़ियों और पेपर लीक की घटनाओं ने छात्रों और अभिभावकों का भरोसा तोड़ दिया है.

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में लगातार पेपर लीक, भ्रष्टाचार और अव्यवस्था सामने आना केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल है. परीक्षा माफियाओं का बच निकलना और ईमानदार छात्रों को मानसिक, आर्थिक और भावनात्मक बोझ झेलने के लिए मजबूर होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.

 

सतीश पौल मुंजनी ने कहा कि NEET जैसी परीक्षा केवल एक एग्जाम नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के सपनों और भविष्य की उम्मीदों का आधार होती है. परीक्षा रद्द होने से अब छात्रों को दोबारा तैयारी, मानसिक तनाव, आर्थिक दबाव और भविष्य की अनिश्चितता का सामना करना पड़ेगा. गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह स्थिति और भी पीड़ादायक है, जिन्होंने कोचिंग, आवास और अध्ययन सामग्री पर अपनी क्षमता से अधिक खर्च किया है.

 

उन्होंने केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों से पूरे मामले की निष्पक्ष, समयबद्ध और पारदर्शी जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की. साथ ही यह सुनिश्चित करने की भी बात कही कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और राष्ट्रीय परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए मजबूत और जवाबदेह व्यवस्था तैयार की जाए.

 

मुंजनी ने कहा कि देश के युवाओं का भविष्य किसी भी राजनीतिक प्रचार, प्रशासनिक लापरवाही या भ्रष्ट तंत्र की भेंट नहीं चढ़ सकता. यदि मेहनत और प्रतिभा के स्थान पर पैसे, पहुंच और पेपर माफियाओं का प्रभाव हावी होगा, तो शिक्षा व्यवस्था में आम लोगों का विश्वास कमजोर होगा. अंत में उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को न्याय, पारदर्शिता और सुरक्षित परीक्षा व्यवस्था चाहिए, न कि बार-बार असफल होती व्यवस्थाओं का बोझ.

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