- 12 हजार से अधिक लोगों का रोजगार अटका
- बालू धाटों का एग्रीमेंट करने की जिम्मेवारी जिला प्रशासन को
Ranchi : झारखंड में 35 बालू घाटों का संचालन शुरू नहीं होने से राज्य सरकार को प्रतिदिन करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. वहीं, लीज एग्रीमेंट लंबित रहने के कारण 12 हजार से अधिक लोगों का रोजगार भी प्रभावित हो गया है. बालू घाट चालू नहीं होने से राज्य में अवैध बालू कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और निर्माण कार्य भी प्रभावित होने लगे हैं.
जानकारी के अनुसार राज्य के 16 जिलों में स्थित 35 बालू घाटों के लिए पर्यावरण स्वीकृति समेत सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं. सफल बोलीदाताओं का चयन भी हो चुका है, लेकिन जिला स्तर पर अब तक लीज एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर नहीं किए गए हैं. एग्रीमेंट पूरा होते ही इन घाटों से वैध रूप से बालू उठाव शुरू हो सकता है.
बताया जा रहा है कि झारखंड में बालू खनन पूरी तरह मैन्युअल प्रक्रिया से किया जाता है, क्योंकि यहां मैकेनिकल माइनिंग की अनुमति नहीं है. एक बालू घाट पर औसतन 60 से 70 ट्रैक्टर लगाए जाते हैं. प्रत्येक ट्रैक्टर में चार मजदूर और एक चालक कार्य करते हैं. इसके अलावा डंपिंग यार्ड, कांटा संचालन और अन्य सहायक कार्यों में भी बड़ी संख्या में लोग जुड़े रहते हैं. इस प्रकार एक घाट से लगभग 350 से 400 लोगों को रोजगार मिलता है. 35 घाटों के आधार पर यह संख्या 12 हजार से अधिक पहुंचती है.
राजस्व के स्तर पर भी राज्य को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. अनुमान है कि यदि इन घाटों से प्रतिदिन 15 से 25 लाख सीएफटी बालू का उठाव होता, तो डीएमएफटी, सेस और अन्य मदों के जरिए सरकार को प्रति सीएफटी 12 से 15 रुपये तक की आय होती. इस हिसाब से एक बालू घाट से प्रतिदिन औसतन 15 से 20 लाख रुपये तक राजस्व प्राप्त हो सकता था. 35 घाटों के आधार पर यह नुकसान प्रतिदिन करीब 5 से 6 करोड़ रुपये तक पहुंच रहा है.
सूत्रों के अनुसार बालू घाटों की टेंडर प्रक्रिया सितंबर 2025 से चल रही है और फरवरी माह में कई घाटों को पर्यावरण स्वीकृति भी मिल चुकी है. इसके बावजूद जिला प्रशासन की ओर से सफल बोलीदाताओं के साथ एग्रीमेंट नहीं किए जाने से घाटों का संचालन शुरू नहीं हो पा रहा है.
इस देरी का सीधा फायदा अवैध बालू कारोबार से जुड़े तत्व उठा रहे हैं. वैध आपूर्ति बाधित होने से निर्माण सामग्री की कीमतों में भी असर देखने को मिल रहा है. जानकारी के मुताबिक राज्य के 298 बालू घाटों के लिए सफल बोलीदाताओं द्वारा सरकार के पास लगभग 1700 करोड़ रुपये जमा कराए जा चुके हैं. इसके बावजूद घाटों का संचालन शुरू नहीं होने से रोजगार, राजस्व और विकास कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है.
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