Ranchi: हरमू स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों के दावों की सच्चाई अब सामने आ रही है और देश की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है. उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है. रुपये की कीमत गिरकर 85 के पार पहुंच गई है और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को कमजोर किया जा रहा है. साथ ही आरोप लगाया कि सरकार बड़े कॉर्पोरेट समूहों का कर्ज माफ करने में लगी है.
भट्टाचार्य ने प्रधानमंत्री के एक बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि लोगों से सोना, पेट्रोल, डीजल और खाद्य तेल की खपत कम करने की सलाह दी गई थी. उन्होंने इस पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री के सामने 9 सुझाव और मांगें रखीं. इनमें प्रमुख रूप से प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर एक वर्ष की रोक, भाजपा के रैलियों और रोड शो पर प्रतिबंध, कॉर्पोरेट कर्ज माफी रोकने, मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के काफिले सीमित करने और उन्हें वर्क फ्रॉम होम मॉडल अपनाने जैसी बातें शामिल हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का निजी कंपनियों को आवंटन रोका जाए, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योगों को बढ़ावा मिले और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दी जाए. इसके अलावा कृषि उत्पादों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करने और महिलाओं के सोने को लेकर नीतियों में बदलाव रोकने की मांग भी रखी.
उन्होंने आशंका जताई कि देश की आर्थिक स्थिति और खराब हो सकती है और सरकार भविष्य में आपातकाल जैसी स्थिति या लॉकडाउन जैसे कदम उठा सकती है. उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक रैंकिंग में भारत की स्थिति प्रभावित हुई है.
नीट परीक्षा विवाद पर भी उन्होंने टिप्पणी की और इसे कोचिंग सिंडिकेट की मिलीभगत बताया. सीबीआई जांच को उन्होंने औपचारिकता करार दिया और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया. भाजपा के पानी और बिजली मुद्दे पर किए गए प्रदर्शन पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि महंगाई और गलत नीतियों ने पहले ही जनता पर बोझ डाल दिया है. भट्टचार्य ने कहा कि वर्तमान आर्थिक नीतियों के चलते देश में भुखमरी और संकट की स्थिति और गंभीर हो सकती है.
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