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9 वर्षों से लंबित जेटेट परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों में आक्रोश, 16 को विधानसभा तक पैदल मार्च

झारखंड में पिछले 9 वर्षों से लंबित झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) के आयोजन की मांग को लेकर प्रशिक्षित अभ्यर्थियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है. इसको लेकर 16 मार्च (सोमवार) को झारखंड प्रशिक्षित शिक्षक संघ के बैनर तले  अभ्यर्थी  पुराने विधानसभा से नए विधानसभा (कुटे मैदान परिसर) तक शांतिपूर्ण पैदल मार्च निकालेंगे और धरना प्रदर्शन करेंगे.
 

Ranchi :  झारखंड में पिछले 9 वर्षों से लंबित झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) के आयोजन की मांग को लेकर प्रशिक्षित अभ्यर्थियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है. इसको लेकर 16 मार्च (सोमवार) को झारखंड प्रशिक्षित शिक्षक संघ के बैनर तले  अभ्यर्थी  पुराने विधानसभा से नए विधानसभा (कुटे मैदान परिसर) तक शांतिपूर्ण पैदल मार्च निकालेंगे और धरना प्रदर्शन करेंगे.

 

26 वर्षों में केवल दो बार हुई जेटेट परीक्षा

संघ के सदस्य चंदन कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि झारखंड राज्य बने 26 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन अब तक केवल दो बार (2013 और 2016) ही जेटेट परीक्षा आयोजित की गई है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक राज्य को हर वर्ष शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करनी चाहिए.

 

चंदन कुमार ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार साल में दो बार सीटेट (CTET) आयोजित करती है. कहा कि 2016 के बाद से जेटेट परीक्षा आयोजित नहीं होने के कारण राज्य के लगभग 5 लाख से अधिक बीएड और डीएलएड प्रशिक्षित अभ्यर्थी शिक्षक बनने के अवसर का इंतजार कर रहे हैं.

 

 

 

परीक्षा ना होने से 26 में सिर्फ 10 हजार पदों पर हुई बहाली

अभ्यर्थियों का कहना है कि हाल ही में हुई सहायक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया में 26,001 पदों के मुकाबले केवल लगभग 10 हजार पदों पर ही बहाली हो सकी, जबकि करीब 16 हजार पद खाली रह गए.

 

अभ्यर्थियों के अनुसार, जेटेट परीक्षा नहीं होने के कारण पर्याप्त पात्र उम्मीदवार उपलब्ध नहीं हो सके. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार न तो जेटेट आयोजित कर रही है और न ही अन्य राज्यों की तरह सीटेट को मान्यता दे रही है.

 

कोर्ट के आदेश के बावजूद नहीं हुई परीक्षा

अभ्यर्थियों के अनुसार, अगस्त 2024 में लगभग 3 लाख अभ्यर्थियों ने जेटेट के लिए आवेदन किया था, जिससे सरकार को करीब 38 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ. इसके बावजूद 18 महीने बीत जाने के बाद भी न तो परीक्षा आयोजित की गई और न ही नियमावली या सिलेबस जारी किया गया.

 

इस मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने भी 31 मार्च से पहले परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया है. लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं दिख रही है. संघ के अनुसार, मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व में एक महीने के भीतर प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन फाइल पिछले चार महीनों से मुख्यमंत्री कार्यालय में लंबित है.

 

16 मार्च को सरकार को दिखाएंगे ‘आईना’

अभ्यर्थियों ने कहा कि राज्य में JSSC और JPSC जैसी अन्य परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं, लेकिन शिक्षक पात्रता परीक्षा को लगातार टाला जा रहा है. इसी के विरोध में बजट सत्र के दौरान 16 मार्च को पैदल मार्च और प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें करीब 2,000 से अधिक अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है. इस आंदोलन का नेतृत्व चंदन कुमार, हरिकेश महतो और हेमंत पाठक सहित संघ के अन्य सदस्य कर रहे हैं.

 

 

 

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