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होर्मुज की जंग से लौटे जमशेदपुर के कैप्टन मनीष, डेढ़ महीने तक खतरे के साये में बचाई 40 जिंदगियां

मानगो निवासी कैप्टन मनीष करीब डेढ़ महीने तक ईरान के समुद्री जलमार्ग होमुर्ज में अपने मालवाहक जहाज के साथ खतरनाक हालात का सामना करने के बाद सकुशल अपने घर लौट आए हैं. उनकी सुरक्षित वापसी पर भाजपा के पूर्व नेता विकास सिंह उनके आवास पहुंचे और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया.
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Jamshedpur : मानगो निवासी कैप्टन मनीष करीब डेढ़ महीने तक ईरान के समुद्री जलमार्ग होर्मुज में अपने मालवाहक जहाज के साथ खतरनाक हालात का सामना करने के बाद सकुशल अपने घर लौट आए हैं. उनकी सुरक्षित वापसी पर भाजपा के पूर्व नेता विकास सिंह उनके आवास पहुंचे और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया.

 

घर लौटने के बाद कैप्टन मनीष ने अपने डरावने अनुभव साझा किए. उन्होंने बताया कि जैसे ही वे बंदरगाह से तेल लेकर निकले, उसी समय युद्ध शुरू हो गया. महज दस किलोमीटर आगे बढ़ते ही समुद्र में मिसाइलों की आवाज, तेज रोशनी और आग के गोले नजर आने लगे.

 

स्थिति को भांपते हुए उन्होंने तुरंत जहाज का जीपीएस सिस्टम बंद कर दिया, इंटरनेट कनेक्शन काट दिया और पूरे जहाज को अंधेरे में डालकर लंगर डाल दिया, ताकि दुश्मन की नजर से बचा जा सके. यह फैसला उनके और उनके साथियों के लिए बेहद अहम साबित हुआ.

 

कैप्टन मनीष के साथ जहाज पर करीब 40 क्रू मेंबर मौजूद थे और सभी की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी. जहाज में भारी मात्रा में तेल लदा था, जिससे जरा सी चिंगारी भी बड़े विस्फोट का कारण बन सकती थी. ऐसे खतरनाक माहौल में उन्होंने डेढ़ महीने तक धैर्य और सूझबूझ से स्थिति को संभाला.

 

उन्होंने बताया कि लगातार खतरे के बीच हर दिन एक नई चुनौती जैसा था. आखिरकार युद्धविराम होने के बाद उन्हें सुरक्षित लौटने का मौका मिला और वे अपने घर वापस आ सके.

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