Ranchi: राज्य में बालू घाटों की नीलामी के बाद उपायुक्त के स्तर पर एकरारनामा का मामला लंबित है. इससे राज्य में बालू के अवैध कारोबारियों की पौ-बारह है. साथ ही आम लोग सामान्य के मुकाबले 10 गुना अधिक कीमत पर बालू खरीदने के लिए मजबूर हैं. एकरारनामा कराने के लिए खान विभाग की कोशिशें भी बेकार साबित हो रही हैं.
खान विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में नीलामी योग्य कुल 444 बालू घाट है. इससे 4000 करोड़ रुपये सालाना राजस्व की उम्मीद जतायी जाती है. लेकिन इन बालू घाटों में से अब तक सिर्फ 299 की ही नीलामी हो पायी है. नीलामी के बाद उपायुक्त के स्तर पर एकरारनामा करने के पहले तक नीलामी में सफल होने वाली कंपनियों या लोगों को कई वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी करने की बाध्यता है.
आंकड़ों के अनुसार, 299 में से सिर्फ 35 सफल ठेकेदार ही इस प्रक्रिया को पूरा करने में सफल हो सके हैं. हालांकि 35 में से सिर्फ 13 ठेकेदारों को ही उपायुक्त के स्तर से एकरारनामा कराने में सफलता मिली है. उपायुक्त के साथ एकरारनामा किये बिना बालू खनन नहीं किया जा सकता है.
झारखंड में करीब आठ वर्षों तक बंद रही बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया दोबारा शुरू होने के बाद उम्मीद थी कि राज्य में अवैध बालू कारोबार पर लगाम लगेगी और सरकार को राजस्व का लाभ मिलेगा. खान विभाग ने 288 बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया पूरी कर ली है. लेकिन अन्य वैधानिक प्रकिया पूरा नहीं हुआ है. लेकिन इनमें 35 बालू घाट ऐसे हैं, जिन्हें एग्रीमेंट होते ही तत्काल चालू किया जा सकता है.
लेकिन जिला प्रशासन की लापरवाही और सुस्ती ने पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं. दुमका के 5, खूंटी के 3, रामगढ़ के 3, रांची के 3, हजारीबाग के 2, गोड्डा के 2, लातेहार के 2, जामताड़ा के 1 और पूर्वी सिंहभूम के 1 बालू घाट समेत कुल 22 बालू घाटों का एग्रीमेंट अब तक लंबित पड़ा है. जानकारी के मुताबिक, इन घाटों की एग्रीमेंट की फाइलें संबंधित जिलों के डीसी के टेबल पर पड़ी है, लेकिन डीसी साहब अपना कलम चलाने का मुहुर्त नहीं निकल पा रहे हैं.
इसका सीधा फायदा अवैध बालू माफियाओं को मिल रहा है. घाट चालू नहीं होने से बाजार में कृत्रिम संकट बना हुआ है और आम लोगों, ठेकेदारों और निर्माण कार्य कराने वालों को महंगे दाम पर बालू खरीदना पड़ रहा है.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब खान विभाग अपनी प्रक्रिया पूरी कर चुका है तो आखिर डीसी स्तर पर एग्रीमेंट में देरी क्यों हो रही है? क्या जिला प्रशासन की यह सुस्ती बालू माफियाओं को फायदा पहुंचाने के लिए है? सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं, लेकिन कई जिलों के डीसी फाइलों पर हस्ताक्षर करने तक को तैयार नहीं दिख रहे. अगर जल्द एग्रीमेंट नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में राज्य में बालू संकट बना रहेगा.
इन 22 बालू घाटों के एग्रीमेंट की फाइल डीसी के पास एक सप्ताह से लंबित
दुमका – 5 घाट - जिसमें चोखाटांड़ बालू घाट,कतलसांडा बालू घाट,सिरमा बालू घाट,हरिपुर (टेपरा-बेर) बालू घाट,एक अन्य घाट
खूंटी – 3 घाट - जिसमें पेंडु बालू घाट,उधरीमोड़ा बालू डिपॉजिट और अमलाचातर बालू घाट
रामगढ़ – 3 घाट - जिसमें सिरका बालू डिपॉजिट,टोकीसूद-1 बालू डिपॉजिट और पांकी बालू डिपॉजिट
रांची – 3 घाट - जिसमें गोसाईं बाला एवं हरली, चबदार बाला एवं हरली और सुंडी बालू डिपॉजिट
हजारीबाग – 2 घाट - जिसमें कांदतरी बालू डिपॉजिट और पिपरासी बालू डिपॉजिट
गोड्डा – 2 घाट - जिसमें जसमता बालू घाट-2 और बनाता बालू घाट
लातेहार – 2 घाट - जिसमें वरमार बालू घाट राजहर बालू घाट
जामताड़ा – 1 घाट - बांकेट बालू घाट
पूर्वी सिंहभूम – 1 घाट - बांकाटा बालू डिपॉजिट
जिन 13 बालू घाटों का एग्रीमेंट हो चुका है
पूर्वी सिंहभूम दो कोरेयामोहनपाल बालू घाट और कोरेयामोहनपाल और स्वर्णरेखा बालू घाट
बोकारो में दो पिचरी-2 बालू घाट,खेतको-चालकारी बालू घाट
रांची में दो श्यामनगर बालू घाट और चोकेसेरेंग बालू डिपॉजिट
गोड्डा में दो राहा बालू घाट और झिलुआ बालू घाट
जामताड़ा में एक आसनचुआ बालू घाट
लातेहार- टुबेद बालू घाट और बाजकुम बालू घाट
हजारीबाग-सांढ़-सोनपुरा बालू घाट, लंगातू-सिकरी-सिरमा बालू घाट
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