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पूर्व रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर बकाया वेतन केस: HC ने वन विभाग में सभी तरह के भुगतान पर लगाई रोक

  • बकाया वेतन की राशि डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से HC के रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय में जमा करने का था कोर्ट का निर्देश
  • अवर सचिव, वन विभाग ने रजिस्ट्रार जनरल को पत्र देकर बताया वर्ष 2022 में ही बकाया भुगतान कर दिया गया है
  • वन सचिव को कारण बताओ नोटिस

Ranchi : कोर्ट का आदेश नहीं मानने और गुमराह करने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी का इजहार किया है. हाईकोर्ट ने मामले में वन सचिव से यह जानना चाहा है कि क्यों नहीं उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाये. न्यायालय ने इस मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया है और अगले आदेश तक वन विभाग में वेतन सहित सभी प्रकार के भुगतान पर पाबंदी लगा दी है. कोर्ट ने इस आदेश की कॉपी मुख्य सचिव को भी भेजने का आदेश दिया है. कोर्ट ने आदेश की प्रति संबंधित कोषागार को भी तत्काल अनुपालन के लिए भेजने का निर्देश दिया है.
 

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की कोर्ट ने बकाया वेतन का भुगतान से संबंधित  तत्कालीन रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (अब सेवानिवृत) आनंद कुमार की अवमानना  याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया है. कोर्ट ने वन विभाग के सभी तरह के भुगतान (प्लान एवं नन प्लान मद) पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी. वन विभाग में वेतन मद की राशि का भुगतान भी नहीं किया जा सकेगा.
 

इससे पहले प्रार्थी आनंद कुमार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि कोर्ट के पिछले आदेश का अनुपालन नहीं किया गया और उनके बकाए का भुगतान नहीं किया गया. वन विभाग के अवर सचिव की ओर से रजिस्ट्रार जनरल को पत्र भेजकर बताया गया है कि उक्त बकाया राशि का भुगतान वर्ष 2022 में कर दिया गया है. जबकि रिट कोर्ट का बकाया भुगतान संबंधी आदेश 30 सितंबर 2024 का था, इस बीच किसी भी तरह की राशि का भुगतान उन्हें नहीं किया गया है. वन सचिव ने कोर्ट में हाजिर होकर बकाया राशि का भुगतान का आश्वासन दिया था. उनके द्वारा दिया गया आश्वासन भी गलत साबित हुआ.

 

विभाग द्वारा दूसरे मद की राशि को ही बकाया राशि दे दिए जाने की झूठी बात कही जा रही है. इससे पहले प्रार्थी की ओर से हस्तक्षेप याचिका (IA) दाखिल की थी, जिसमें प्रार्थी ने वन सचिव द्वारा कोर्ट को गुमराह करने एवं गलत जानकारी देने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ Perjury Proceeding  चलाने की गुहार लगाई है. उनका कहना था कि दूसरे मद के पैसे को उनके बकाया राशि में कन्वर्ट कर कहा जा रहा है कि वह बकाया राशि दे चुके हैं.  वन सचिव अबू बकर सिद्दीकी ने कोर्ट में बकाया वेतन देने का जो आश्वासन दिया था उसे पूरा नहीं किया. हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास भी अवर सचिव, वन विभाग की ओर से जो पत्र भेजा गया है वह झूठा है. 

 

दरअसल, पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता आनंद कुमार के बकाया वेतन का भुगतान करने का निर्देश वन विभाग को दिया था. बकाया वेतन की राशि डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय में जमा करने का निर्देश था.

 

यहां बता दें कि प्रार्थी की सेवा के दौरान की संचयात्मक प्रभाव से तीन इंक्रीमेंट राशि (वर्ष 2005 से 2007 तक) विभाग ने रोक दी थी. इसकी राशि बकाया थी. आनंद कुमार 31 मार्च 2023 को सेवानिवृत हो चुके हैं. पूर्व की सुनवाई के दौरान वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीकी व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए थे.
 

राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि विभाग याचिकाकर्ता के बकाया वेतन का भुगतान करने के लिए तैयार है, हालांकि यह भुगतान इससे संबंधित एक अपील (एल.पी.ए. संख्या 216/2025) के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगा. सरकार ने यह भी बताया था कि पेंशन एवं अन्य सेवा लाभों को लेकर पहले पारित आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की गई है, जिस पर 13 फरवरी 2026 को स्थगन आदेश पारित किया गया है.

 

कोर्ट ने विभागीय सचिव द्वारा दिए गए आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता के बकाया वेतन की राशि डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से एक सप्ताह के भीतर झारखंड हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय में जमा कराई जाए. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि आनंद कुमार आवेदन देते हैं तो ग्रीष्मावकाश के दौरान भी उक्त डिमांड ड्राफ्ट तत्काल उन्हें जारी किया जाए.

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