Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने जोन्हा फॉल के निकट कच्ची सड़क मसरीजारा से हेसलाबेड़ा तक करीब 1.8 किलोमीटर पक्की सड़क निर्माण के मामले में कोर्ट के स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई की. मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार को 6 माह में उक्त सड़क का काम पूरा करने का निर्देश दिया. साथ ही 21 जनवरी 2027 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा कि अगर प्रस्तावित सड़क 6 माह में प्रस्तावित सड़क पूरा नहीं होता है तो ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव जिम्मेदार होंगे.
खंडपीठ ने याचिका निष्पादित कर दी. इससे पहले रेलवे की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उसने प्रस्तावित सड़क के प्लान पर NOC दे दिया है.
केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता प्रशांत पल्लव एवं शिवानी जालूका ने पक्ष रखा. वहीं राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता विभोर मयंक ने पक्ष रखा. पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि प्रस्तावित सड़क का विस्तृत ले आउट प्लान बना लिया गया है. उसे अनुमोदन के लिए रेलवे को भेजा गया है.
जिसपर खंडपीठ ने प्रस्तावित सड़क का विस्तृत लेआउट प्लान पर रेलवे को जल्द अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) देने को कहा था. यहां उल्लेखनीय है कि पूर्व की सुनवाई में खंडपीठ ने सुझाव दिया था कि उक्त सड़क की चौड़ाई कम-से-कम 8 मीटर रखी जाए, ताकि दो वाहन आसानी से एक-दूसरे को पार कर सकें. खंडपीठ ने यह भी कहा था कि संबंधित क्षेत्र में कई पर्यटन स्थल हैं, ऐसे में मात्र 5 मीटर चौड़ी सड़क भविष्य में यातायात जाम की समस्या पैदा कर सकती है.
मामले में पक्षकारों ने 5 मीटर चौड़ी सड़क का प्रस्ताव रखा था. बताया गया था कि रेलवे अधिकारियों ने सिद्धांततः अपनी भूमि पर 5 से 6 मीटर चौड़ी सड़क निर्माण की सहमति दी है. खंडपीठ ने निर्देश दिया था कि शेष चौड़ाई सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार अपनी भूमि उपलब्ध कराए, ताकि सड़क की कुल चौड़ाई कम-से-कम 8 मीटर हो सके. साथ ही, रेलवे सीमा से बाहर पड़ने वाले हिस्सों के लिए भी राज्य सरकार को अपनी भूमि का उपयोग करना होगा.
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