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नक्सलियों के खिलाफ चले ब्लैक थंडर ऑपरेशन से जुड़ा मामला : सबूत के अभाव में आरोपी हाईकोर्ट से बरी

  • 2010 में पश्चिम सिंहभूम के सारंडा जंगल में नक्सलियों के खिलाफ चला था ऑपरेशन
  • माओवादियों के प्रशिक्षण शिविर पर मारा गया था छापा
  • मुठभेड़ में एक कोबरा जवान की हुई थी मौत

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने एक आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए सोमा तारकोट (सोमा टोरकोट) को सभी आरोपों से बरी कर दिया है.


कोर्ट ने सोमा तारकोट की सजा और दोषसिद्धि पूरी तरह रद्द कर उसे तुरंत रिहा करने का आदेश (यदि किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हो) दिया है. हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की.


चाईबासा की निचली अदालत ने सोमा तारकोट को अगस्त-सितंबर 2018 में दोषी ठहराते हुए हत्या, हत्या का प्रयास, सरकारी कार्य में बाधा व दंगा करने जैसे गंभीर आरोपों में सजा सुनाई थी.


इसे सोमा तारकोट ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, हाई कोर्ट ने उसकी अपील स्वीकार की थी.यह मामला वर्ष 2010 में पश्चिम सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में नक्सलियों के खिलाफ चलाये गये ब्लैक थंडर ऑपरेशन से जुड़ा हुआ था.


इस दौरान पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी, जिसमें एक कोबरा जवान की मौत हो गयी थी.पुलिस के अनुसार 26 सितंबर 2010 को सारंडा जंगल में माओवादियों के प्रशिक्षण शिविर पर छापा मारा गया.


मुठभेड़ के दौरान दोनों ओर से गोलीबारी हुई. पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें सोमा तारकोट भी शामिल था. उसके पास से विस्फोटक सामग्री और अन्य सामान बरामद होने का दावा किया गया.


साबित नहीं हुआ आरोपी किसी नक्सली संगठन का सदस्य है :  हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला है. जब्त किये गये सामान  कोर्ट में पेश ही नहीं किये गये. 


हाईकोर्ट ने कहा कि यह साबित नहीं हुआ कि आरोपी किसी नक्सली संगठन (MCC) का सदस्य था. अन्य सह आरोपी पहले ही संदेह का लाभ पाकर बरी हो चुके हैं. हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला अनुमान और अंदाज पर आधारित था.

 

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