Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट में MP/MLA के लंबित मामलों के जल्द निष्पादन को लेकर कोर्ट के स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई. मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा शपथ-पत्र दाखिल किया गया था. कोर्ट को बताया गया कि हाल ही में MP/MLA का एक मामला निपटाया गया है. वर्तमान में सांसद/विधायक (MP/MLA) से जुड़े केवल 10 मामले लंबित हैं.
मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ में हुई. खंडपीठ ने सीबीआई से मौखिक रूप से कहा कि राज्य में एमपी-एमएलए के लंबित आपराधिक मामलों को जल्द निष्पादित करें. ट्रायल में देरी होने से गवाहों पर भी असर पड़ता है, उनकी गवाही प्रभावित होती है. खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 10 जून 2026 निर्धारित की है.
यहां गौरतलब है मामले में पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से बताया गया था कि उसके पास एमपी /एमएलए के आपराधिक दो मामले थे. जिनमें से एक मामला जो पूर्व मंत्री बंधु तिर्की से जुड़ा था, सीबीआई को ट्रांसफर हो चुका है. इस मामले में विजिलेंस स्पेशल केस संख्या 66/ 2010 दर्ज थी. वहीं, बीज घोटाला से संबंधित स्पेशल विजिलेंस केस 15/ 2009 में पूर्व विधायक नलिन सोरेन और सत्यानंद भोक्ता के खिलाफ मामला विजिलेंस कोर्ट में चल रहा है.
बता दें कि पूर्व की सुनवाई में सीबीआई ने कोर्ट को बताया था कि झारखंड में एमपी-एमएलए के 11 लंबित आपराधिक मामले राज्य की विभिन्न अदालतों में चल रहे हैं. वहीं, एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को बताया था कि झारखंड में एमपी-एमएलए के कई मामले में आरोप पत्र दायर होने के बाद आरोप गठन में 6 साल लग जाते हैं, जिससे ट्रायल पूरा होने में कई वर्ष लग जाएंगे.
सीबीआई की मंशा ही नहीं है कि ट्रायल जल्द पूरा हो. जिस पर कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की थी कि सीबीआई जैसी संस्था गवाहों को जल्द लाने में असफल साबित हो रही है, ट्रायल में देरी होने से गवाहों में डर का भी माहौल बना रहता है. एक मामले में सीबीआई ने भी स्वीकार किया है कि ट्रायल में गवाहों को धमकाये जाने की आशंका के मद्देनजर उस गवाह की गवाही करने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का भी सहारा लेना पड़ा है.
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