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हाईकोर्ट की फटकार के बाद भी झारखंड के 606 थानों में नहीं लगे CCTV, दो महीने में कैमरे लगाने का दावा

झारखंड हाईकोर्ट के बार-बार निर्देश और फटकार के बावजूद राज्य के 606 थानों में अब तक सीसीटीवी कैमरे नहीं लग पाए हैं. थानों में पारदर्शिता बढ़ाने और हिरासत में होने वाली घटनाओं की निगरानी को लेकर हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया था, जिसके बाद अब पुलिस मुख्यालय और जैप-आईटी (JAP-IT) परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने में जुट गए हैं.
 

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट के बार-बार निर्देश और फटकार के बावजूद राज्य के 606 थानों में अब तक सीसीटीवी कैमरे नहीं लग पाए हैं. थानों में पारदर्शिता बढ़ाने और हिरासत में होने वाली घटनाओं की निगरानी को लेकर हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया था, जिसके बाद अब पुलिस मुख्यालय और जैप-आईटी (JAP-IT) परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने में जुट गए हैं.

 

जैप-आईटी के निदेशक आईएएस चंदन कुमार ने बताया कि राज्य के सभी थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की तैयारी पूरी कर ली गई है. अगले दो महीने के भीतर झारखंड के सभी जिलों के थानों में कैमरे स्थापित कर दिए जाएंगे.

 

जानकारी के अनुसार, थानों के मुख्य प्रवेश द्वार, हाजत (लॉकअप), थाना प्रभारी कक्ष, पूछताछ कक्ष, मालखाना, बरामदा और थाना परिसर समेत सभी महत्वपूर्ण स्थानों पर हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे. कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाएगी और इसकी निगरानी जिला स्तर के कंट्रोल रूम के साथ-साथ पुलिस मुख्यालय से भी की जा सकेगी.

 

 

दरअसल पिछले कुछ वर्षों में थानों और हाजतों में बंद लोगों के साथ मारपीट, प्रताड़ना और संदिग्ध मौतों की शिकायतें सामने आती रही हैं. कई मामलों में वीडियो साक्ष्य नहीं होने के कारण जांच प्रभावित हुई. इसी को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य के सभी थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया था. सुनवाई के दौरान कई बार संबंधित विभागों और अधिकारियों को फटकार भी लगाई गई, लेकिन योजना धरातल पर पूरी तरह नहीं उतर सकी.

 

इन्हीं घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि प्रत्येक पुलिस थाने और हाजत में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं ताकि पुलिस कार्रवाई की निगरानी हो सके और किसी भी शिकायत की स्थिति में वीडियो साक्ष्य उपलब्ध रहे. बाद में हाईकोर्ट ने भी इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए राज्य में आदेश के अनुपालन की समीक्षा की थी.

 

पुलिस और आम जनता दोनों को होगा लाभ

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि सीसीटीवी कैमरे लगने से जहां एक ओर हिरासत में प्रताड़ना और मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायतों पर अंकुश लगेगा, वहीं दूसरी ओर पुलिसकर्मियों पर लगने वाले झूठे आरोपों की भी निष्पक्ष जांच हो सकेगी. थानों में आने वाले फरियादियों, आरोपियों और पुलिसकर्मियों की गतिविधियां रिकॉर्ड होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और जवाबदेही तय करना आसान होगा.

 

दो महीने में पूरा होगा काम

जैप-आईटी और पुलिस मुख्यालय का कहना है कि तकनीकी और प्रशासनिक तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं. कैमरों की खरीद, नेटवर्किंग और निगरानी व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार, अगले दो महीने में राज्य के सभी थानों को सीसीटीवी नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है.

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