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78वें सेना दिवस पर CDS जनरल अनिल चौहान का संदेश : बीती उपलब्धियों पर नहीं, भविष्य की तैयारियों पर दें ध्यान

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने 78वें सेना दिवस के मौके पर भारतीय सेना की भूमिका और ताकत को लेकर बड़ा संदेश दिया. उन्होंने भारतीय सेना को देश की सुरक्षा व्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि सेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए लगातार खुद को तैयार और आधुनिक बनाते रहना होगा.
 
  • भारतीय सेना सबसे भरोसेमंद सुरक्षा स्तंभ
  • भविष्य के युद्ध बहु-क्षेत्रीय होंगे
  • युद्ध एक मोर्चे तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि जमीन, हवा, समुद्र, साइबर और अंतरिक्ष जैसे कई क्षेत्रों में एक साथ लड़े जाएंगे
  • सेना को आगे की सोच के साथ तैयार रहना होगा
  • भविष्य की चुनौतियों के लिए सेना, नौसेना और वायुसेना को मिलकर काम करना होगा

Lagatar Desk : चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने गुरुवार को 78वें सेना दिवस के अवसर पर भारतीय सेना के सभी रैंकों, उनके परिवारों, पूर्व सैनिकों और वीर नारियों को शुभकामनाएं दीं और सेना की वीरता की विरासत और भविष्य के युद्धों के लिए निरंतर अनुकूलन की आवश्यकता पर जोर दिया. 

 


सीडीएस चौहान ने भारतीय सेना को राष्ट्र की रक्षा संरचना का आधारशिला और इसका सबसे भरोसेमंद स्तंभ बताया. उन्होंने कहा कि भारतीय सेना का इतिहास साहस, बलिदान और देश के प्रति अटूट निष्ठा से भरा हुआ है.

 

सेना ने हर बार देश को बाहरी और आंतरिक खतरों से सुरक्षित रखा है. अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि इस दौरान भारतीय सेना ने अपने अदम्य साहस और रणनीतिक क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया, जिस पर पूरा देश गर्व करता है. 

 

 

भविष्य के युद्धों के लिए तैयार रहना जरूरी

सीडीएस ने सेना को बीते समय की उपलब्धियों पर निर्भर न रहने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि बदलते दौर में युद्ध का स्वरूप भी बदल रहा है, ऐसे में सेना को आगे की सोच के साथ तैयारी करनी होगी. उन्होंने भारतीय सेना द्वारा शुरू किए गए आधुनिकीकरण प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए यह एक जरूरी कदम है. 

 

तीनों सेनाओं में बेहतर तालमेल पर जोर

जनरल चौहान ने कहा कि आने वाले समय में युद्ध केवल एक मोर्चे तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि जमीन, हवा, समुद्र, साइबर और अंतरिक्ष जैसे कई क्षेत्रों में एक साथ लड़े जाएंगे. ऐसे में सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच बेहतर तालमेल और संयुक्त रणनीति बेहद जरूरी है. इसके लिए संरचनात्मक सुधार और काम करने के तरीके में बदलाव लाना होगा. 

 

‘जय’ मंत्र अपनाने की अपील

अनिल चौहान ने भारतीय सेना से प्रधानमंत्री के दिए गए “जय” मंत्र को अपनाने की अपील की, जिसका मतलब संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार है. उन्होंने कहा कि एकीकृत योजना, प्रशिक्षण और संचालन को मजबूत करने के साथ-साथ स्वदेशी तकनीक और संसाधनों को बढ़ावा देना जरूरी है. 

 

सेना पर देश को पूरा भरोसा

 जनरल चौहान ने अपने संदेश के अंत में भरोसा जताया कि भारतीय सेना आने वाले समय में एकीकृत ढांचे की ओर बढ़ते हुए हर चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार रहेगी और देश की सुरक्षा में अपनी अहम भूमिका निभाती रहेगी. 

 

क्यों मनाया जाता है सेना दिवस

हर साल 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता है. इसी दिन 1949 में जनरल के.एम. करियप्पा ने अंतिम ब्रिटिश कमांडर जनरल एफ.आर.आर. बुचर से भारतीय सेना की कमान संभाली थी और वे स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ बने थे. 

 

 

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