Ranchi News: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने 3,260 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) से जुड़े कथित टैक्स चोरी के मामले को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि इन दलों के जरिए 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के कथित टैक्स खेल की बात सामने आई है. ऐसे में सरकार को बताना चाहिए कि इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है.
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राकेश सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशों में जमा काला धन वापस लाने की बात कही थी. लेकिन अब देश में ही काले धन को सफेद करने के कथित मामले सामने आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर 3,260 राजनीतिक दलों के जरिए इतनी बड़ी टैक्स चोरी हुई है, तो सरकार को इसकी जांच और कार्रवाई की पूरी जानकारी जनता को देनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि आम लोगों की छोटी टैक्स गलती पर भी नोटिस भेजा जाता है. वहीं हजारों करोड़ रुपये के कथित टैक्स मामले में कार्रवाई को लेकर सरकार की चुप्पी समझ से परे है.
कांग्रेस नेता ने 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के बैंक खातों पर हुई कार्रवाई का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के खातों को फ्रीज किया गया और भारी टैक्स नोटिस दिए गए. ऐसे में सवाल है कि राजनीतिक दलों से जुड़े कथित टैक्स मामलों में कार्रवाई की गति अलग क्यों दिखाई दे रही है.
राकेश सिन्हा ने केंद्र सरकार से कई सवाल पूछे हैं. उन्होंने जानना चाहा कि 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की कथित टैक्स चोरी में अब तक कितनी राशि की वसूली हुई है. कितने मामलों की जांच पूरी हुई है और कितने लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है.
उन्होंने यह भी पूछा कि कितने राजनीतिक दलों के पंजीकरण या मान्यता को लेकर कार्रवाई हुई है और क्या इन दलों का किसी प्रभावशाली व्यक्ति या संगठन से संबंध सामने आया है.
राकेश सिन्हा ने कहा कि टैक्स कानून सभी के लिए समान होना चाहिए. कानून का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए नहीं होना चाहिए. साथ ही किसी भी तरह की कथित टैक्स चोरी पर सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए.
उन्होंने भाजपा के ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा नारे का जिक्र करते हुए कहा कि अगर हजारों करोड़ रुपये के कथित टैक्स खेल का मामला सामने आया है, तो सरकार को जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए.
कांग्रेस मीडिया प्रभारी ने कहा कि अगर इन आरोपों में सच्चाई है, तो मामला केवल टैक्स चोरी तक सीमित नहीं है. इससे देश की चुनावी व्यवस्था और राजनीतिक दलों की पारदर्शिता पर भी सवाल उठता है.
उन्होंने केंद्र सरकार से पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने और जांच से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की. राकेश सिन्हा ने सवाल किया कि 3,260 कथित फर्जी राजनीतिक दलों का नेटवर्क किसके संरक्षण में चलता रहा और इस पूरे मामले का असली लाभार्थी कौन है.
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