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हजारीबाग में अवैध खनन पर केंद्र सरकार का कड़ा रूख, RCCF के खिलाफ जांच कर कार्रवाई के निर्देश

Ranchi :   हजारीबाग जिले में 156 हेक्टेयर क्षेत्र में हुए अवैध खनन की सीआईडी जांच में पुष्टि होने के बावजूद वन विभाग द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने पर केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है.

 

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने झारखंड सरकार को रिमाइंडर भेजकर हजारीबाग के क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक (RCCF) के खिलाफ लगे गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.  

 

मंत्रालय ने यह कदम एक सार्वजनिक शिकायत के बाद उठाया है, जो CPGRAM पोर्टल पर दर्ज की गई थी. हजारीबाग के रहने वाले शनि कांत ने शिकायत में आरोप लगाया था कि अवैध खनन की पुष्टि होने के बावजूद वन विभाग और सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया. शिकायत में संबंधित अधिकारी को उच्च स्तर का संरक्षण प्राप्त होने का भी दावा किया गया है.

 

केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए रिमाइंडर में कहा गया है कि इस मामले में 23 दिसंबर 2025 को भी पत्र भेजा गया था, लेकिन न तो कोई कार्रवाई हुई और न ही संतोषजनक जवाब मिला. इसी वजह से अब रिमाइंडर भेजा गया है. पत्र में झारखंड सरकार से दोबारा मामले की समीक्षा कर तुरंत कार्रवाई करने को कहा गया है. 

 

यह पत्र 5 जनवरी 2026 को मंत्रालय के वैज्ञानिक ‘ई’ चारण जीत सिंह द्वारा डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित है. इसकी कॉपी झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक, FCA नोडल अधिकारी और केंद्रीय वन उप महानिदेशक (क्षेत्रीय कार्यालय, रांची) को भी भेजी गई है. 

 

जानें क्या है पूरा मामला

आरोप है कि हजारीबाग के तत्कालीन वन प्रमंडल पदाधिकारी (पश्चिमी वन प्रमंडल) ने अपने पद का दुरुपयोग किया. उन्होंने अवैध खनन में शामिल लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी नियमों और तथ्यों को नजरअंदाज किया.

 

कहा गया है कि हजारीबाग के तत्कालीन वन प्रमंडल पदाधिकारी ने NTPC और उसकी खनन कंपनी त्रिवेणी सैनिक माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड को लाभ पहुंचाने के लिए रिपोर्ट में सरकारी शर्तों और आदेशों की गलत जानकारी दी और महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाकर सरकार को रिपोर्ट भेजी.

 

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जिस दुमुहानी नाले में अवैध खनन हुआ था, वन विभाग की रिपोर्ट में उस नाले की चौड़ाई 20 से 30 मीटर बताई गई थी. लेकिन  नाले को डाइवर्ट करने की प्रक्रिया के दौरान उसकी चौड़ाई घटाकर 4 से 5 मीटर कर दी गई है. यह पर्यावरण नियमों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है. 

 

 

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