New Delhi : केंद्र सरकार ने इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को सुरक्षित करार देते हुए कहा है और E20 के इस्तेमाल से गाड़ी के इंश्योरेंस की वैलिडिटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
केंद्र की मोदी सरकार ने उन चिंताओं को खारिज किया है, जिसमें कहा जा रहा है कि E20 फ्यूल के इस्तेमाल से गाड़ी के इंश्योरेंस पॉलिसी की वैलिडिटी पर असर पड़ सकता है.
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा है कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग जानबूझकर भ्रम फैलाने वाली बातें फैला रहे हैं. पुराने फोटो और वीडियो को नये बताकर शेयर किया जा रहा है, ताकि लोगों में बेवजह डर पैदा हो और वीडियो को ज्यादा व्यूज मिले.
मंत्रालय ने कहा कि ईंधन टैंक के पास चींटियों के जमा होने या पेट्रोल में गन्ने का रस सीधे मिलाये जाने वाले वायरल वीडियोफर्जी हैं, इथेनॉल औद्योगिक प्रक्रिया से बनता है और इसमें कोई अवशिष्ट शर्करा (Residual Sugar) नहीं होती.
मंत्रालय कहा है कि भारत का इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम सुरक्षित, ग्राहकों के लिए फायदेमंद और आर्थिक रूप से लाभकारी है. E20 फ्यूल के इस्तेमाल को इंश्योरेंस के अमान्य होने से जोड़ने वाले दावों पर संबंधित स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत कर स्थिति स्पष्ट कर दी गयी है. इंश्योरेंस पॉलिसी की वैलिडिटी पर असर पड़ने के दावे गलत पाये गये हैं.
मंत्रालय ने कहा, इथेनॉल ब्लेंडिंग दुनिया भर में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया है. इसे अमेरिका, ब्राज़ील और जापान समेत कई देशों में सफलतापूर्वक लागू किया गया है.
इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम साल 2003 में शुरू हुआ था. इसका मकसद कच्चे तेल का आयात कम करना, देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना और पर्यावरण को बेहतर बनाना है. पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाना ई20) शुरू किया गया.
सरकार के अनुसार E20 पेट्रोल आने के बाद से अब तक एथेनॉल की वजह से इंजन खराब होने या गाड़ी बंद होने की कोई बड़ी शिकायत सामने नहीं आयी है.इस कार्यक्रम से देश को कच्चे तेल के आयात में करीब 1.4 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है. साथ ही किसानों की फसलों की मांग बढ़ी है,
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