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Chaibasa News: नवनियुक्त 360 सहायक शिक्षकों को मिला प्रशिक्षण, शिक्षक राष्ट्र के भविष्य का निर्माता-DC

पश्चिमी सिंहभूम जिले में नवनियुक्त शिक्षकों को प्रशासन की शैक्षणिक कार्ययोजना एवं नवाचारों से जोड़ने के उद्देश्य से मंगलवार को चाईबासा स्थित कोल्हान विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में ‘प्रोजेक्ट परख: तैयारी उड़ान की’ के अंतर्गत जिले के सभी नवनियुक्त सहायक आचार्यों के लिए एक दिवसीय उन्मुखीकरण-सह-प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया.
 
पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिला की खबरें
  • - गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन, नवाचार एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता देने का उपायुक्त ने किया आह्वान

Sukesh kumar

Chaibasa: पश्चिमी सिंहभूम जिले में नवनियुक्त शिक्षकों को प्रशासन की शैक्षणिक कार्ययोजना एवं नवाचारों से जोड़ने के उद्देश्य से मंगलवार को चाईबासा स्थित कोल्हान विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में ‘प्रोजेक्ट परख: तैयारी उड़ान की’ के अंतर्गत जिले के सभी नवनियुक्त सहायक आचार्यों के लिए एक दिवसीय उन्मुखीकरण-सह-प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया. 

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जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए 360 नवनियुक्त सहायक आचार्यों ने सहभागिता की. कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में उपायुक्त आशीष कुमार शामिल हुए. उनके साथ उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, प्रशिक्षु आईएएस ईरा जोरवाल तथा जिला शिक्षा अधीक्षक प्रवीण कुमार सहित शिक्षा विभाग के अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे.

 

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कार्यक्रम का उद्देश्य नवपदस्थापित सहायक आचार्यों को विद्यालयी शिक्षा के प्रति प्रशासन की सोच, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की अवधारणा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पद्धति, अनुशासित विद्यालयी वातावरण, नवाचार आधारित गतिविधियों तथा शिक्षक के सामाजिक उत्तरदायित्वों से अवगत कराना था, ताकि वे अपने-अपने विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को नई दिशा दे सकें. 


कार्यशाला को संबोधित करते हुए उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि एक शिक्षक केवल ज्ञान का संचार करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज, राज्य और राष्ट्र के भविष्य का निर्माता होता है. विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है. ऐसे में प्रत्येक सहायक आचार्य को अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी, संवेदनशीलता एवं समर्पण की भावना के साथ करना चाहिए. 


उपायुक्त ने शिक्षकों से विद्यालयों में समयबद्ध एवं नियमित शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन, विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने, प्रत्येक बच्चे की सीखने की क्षमता का निरंतर मूल्यांकन करने तथा कमजोर विद्यार्थियों के लिए विशेष शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराने का आह्वान किया. 


उन्होंने ‘प्रोजेक्ट परख: तैयारी उड़ान की’ के विभिन्न आयामों पर चर्चा करते हुए बताया कि इसके अंतर्गत विद्यालयों में आयोजित खेल महोत्सव,  अतिथि भोज सह जन्मोत्सव कार्यक्रम, परख जांच परीक्षा, नियमित शैक्षणिक मूल्यांकन, प्रेरक गतिविधियां, विद्यार्थियों की प्रतिभा पहचान कार्यक्रम, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां तथा विद्यालय आधारित नवाचारों का उद्देश्य बच्चों में सीखने के प्रति रुचि विकसित करना तथा उन्हें आत्मविश्वासी एवं प्रतिस्पर्धी बनाना है.

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