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Chaibasa News : चक्रधरपुर में हड़ताल के दौरान नाराजगी व्यक्त करते दवा दुकानदार

Shambhu Kumar

Chakradharpur : पश्चिम सिंहभूम जिले में केमिस्ट्स ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के आह्वान पर सभी थोक व खुदरा दवा दुकाने बुधवार को बंद रही. एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश ठक्कर व सचिव रमेश ख़िरवाल ने बताया कि राष्ट्रीय संगठन ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स व ड्रगिस्ट्स तथा झारखंड केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के तत्वावधान में यह बंद पूरे भारत वर्ष में है.

 

राष्ट्रीय संगठन देशभर के 12.40 लाख से अधिक केमिस्ट्स एवं वितरकों का प्रतिनिधित्व करता है .हमारे द्वारा केंद्र व राज्य स्तर पर विभिन्न प्राधिकरणों के समक्ष बार-बार निवेदन करने के बावजूद, औषधि व्यापार व जन स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले गंभीर मुद्दे अब तक अनसुलझे हैं.

 

यह स्थिति अब अत्यंत चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है.वहीं चक्रधरपुर में सभी दुकाने बंद का हड़ताल का समर्थन किया। चक्रधरपुर के पवन चौक पर सभी दवा दुकानदार हड़ताल का समर्थन किया.ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर देशभर के केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट्स द्वारा अवैध व अनियंत्रित ऑनलाइन दवा बिक्री तथा जन स्वास्थ्य व लाखों छोटे केमिस्ट्स के अस्तित्व से जुड़े गंभीर मुद्दों के विरोध में राष्ट्रव्यापी एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल सफलतापूर्वक आयोजित की गई.

 

AIOCD व झारखंड राज्य केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के आह्वान पर पश्चिम सिंहभूम जिले के सभी केमिस्ट व ड्रगिस्ट्स ने अपने प्रतिष्ठान पूर्णतः बंद रखकर आंदोलन को सर्वसम्मति से समर्थन प्रदान किया.

 


मांगो में मुख्य रूप से दवाओं की अवैध व अनियमित ऑनलाइन बिक्री।बिना वैध व सत्यापित चिकित्सकीय पर्चे के दवाओं की बिक्री व होम डिलीवरी,ऑनलाइन दवा प्लेटफॉर्म्स द्वारा अत्यधिक छूट की अनुचित नीति, जिससे छोटे व लाइसेंसधारी केमिस्ट्स गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं.

 

बंद समर्थकों ने कहा की तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए, जिनका दुरुपयोग विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स व क्विक कॉमर्स ऑपरेटर्स द्वारा दवाओं की अनियंत्रित डिलीवरी के लिए किया जा रहा है. केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट्स ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि दवाएं सामान्य उपभोक्ता वस्तु नहीं हैं तथा उचित सत्यापन के बिना उनकी अनियंत्रित ऑनलाइन बिक्री जन स्वास्थ्य, मरीजों की सुरक्षा एवं ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के अंतर्गत स्थापित नियामकीय व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर रही है.

 

 

 


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