- ऊर्जा संक्रमण से विस्थापन व आजीविकाओं को नुकसान
- पर्यावरणीय प्रदूषण में भी वृद्धि
Ranchi : झारखंड के चंद्रपुरा में कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्र के आसपास के समुदायों ने अपनी आवाज उठाई है, जिसमें उन्होंने न्यायसंगत ऊर्जा संक्रमण (जस्ट एनर्जी ट्रांजिशन – जेइटी ) की मांग की है.
इसको लेकर गुरुवार को एचआरडीसी सभागार में सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी (सीएफए) और बिंदराई इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च स्टडी एंड एक्शन (बिरसा) ने चंद्रपुरा की आवाज : झारखंड में न्यायपूर्ण ऊर्जा संक्रमण का सामूहिक निर्माण" रिपोर्ट जारी की.
रिपोर्ट में बताया गया है कि औद्योगिक विकास ने स्थानीय समुदायों को वादा किए गए लाभ प्रदान नहीं किए हैं, जिससे विस्थापन और पारंपरिक आजीविकाओं को नुकसान के साथ-साथ पर्यावरणीय प्रदूषण हुआ है.
चंद्रपुरा में ऊर्जा संक्रमण की चुनौती
झारखंड के चंद्रपुरा में कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्र के विस्तार की योजना ने स्थानीय समुदायों के बीच चिंता और आशा की मिश्रित भावनाएं पैदा की हैं.
एक ओर, यह परियोजना ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास के अवसर प्रदान करती है. वहीं दूसरी ओर, यह पर्यावरणीय गिरावट और स्थानीय लोगों के विस्थापन के खतरे को भी उजागर कर रही है.
क्या है प्रमुख मांगें
- स्वतंत्र, पूर्व और सूचित सहमति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
- समुदाय आधारित और विकेंद्रीकृत निर्णय-प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए.
- पर्यावरणीय क्षति की भरपाई की जानी चाहिए और अतीत में हुए नुकसान का निवारण किया जाना चाहिए.
- अनौपचारिक श्रमिकों की असुरक्षा को दूर किया जाना चाहिए और लाभ और नुकसान सभी में समान रूप से बांटे जाने चाहिए.
समुदायों की चिंताएं
- रोजगार की कमी और ठेका-आधारित काम.
- पर्यावरणीय प्रदूषण, विशेष रूप से फ्लाई ऐश और धूल.
- बुनियादी सुविधाओं तक सीमित पहुंच.
- सरकारी और कंपनियों के प्रति अविश्वास.
रिपोर्ट की फैक्ट फाइल
- कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्र के विस्तार से स्थानीय समुदायों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.
- नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में वृद्धि हुई है, लेकिन कोयले का उत्पादन और उपभोग उच्च स्तर पर है.
- जेइटी एक ही साइज का या ऊपर से नीचे वाला प्रोसेस नहीं हो सकता, इसमें समुदायों की सहमति और भागीदारी आवश्यक है.
रिर्पोट में क्या गिनाए गए हैं प्रदूषण के कारण
- कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्र का विस्तार : डीवीसी ने चंद्रपुरा विद्युत स्टेशन के विस्तार की योजना की घोषणा की है, जिसमें दो नए 800 मेगावाट के अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल यूनिट जोड़े जाएंगे.
- पर्यावरणीय चिंताएं : स्थानीय समुदायों ने फ्लाई ऐश और धूल के कारण पर्यावरणीय गिरावट की चिंता व्यक्त की है.
- बुनियादी सुविधाओं की कमी : ग्रामीणों ने बिजली उत्पादन स्थलों के पास रहने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं तक सीमित पहुंच की शिकायत की है.
- रोजगार और ठेकेदारी : स्थानीय लोगों ने रोजगार और ठेकेदारी में बाहरी लोगों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया है.
- सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता : ग्रामीणों में भविष्य के विकास में स्थानीय रोजगार को प्राथमिकता देने और प्रदूषण रहित होने की प्रबल इच्छा है.
झारखंड में ऊर्जा की स्थिति
- झारखंड की कुल स्थापित विद्युत क्षमता लगभग 5,990 मेगावाट है.
- कोयला आधारित ताप विद्युत प्रमुख स्रोत बना हुआ है.
- नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता, विशेष रूप से सौर ऊर्जा, बढ़ रही है. लेकिन अभी भी इसका हिस्सा बहुत कम है.
चंद्रपुरा के गांवों की स्थिति
- चंद्रपुरा के सामुदायिक विकास (सीडी) ब्लॉक में 28 गांव हैं.
- ग्रामीण आजीविका और औद्योगीकरण, विशेष रूप से कोयला खनन और तापीय विद्युत उत्पादन के प्रभावों के बीच एक जटिल अंतर्संबंध है.
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