New Delhi : सीबीआई दिल्ली ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर हुई इकलौती सबसे बड़ी ठगी के मामले में Axis Bank के डिप्टी मैनेजर और मेसर्स हिमालयन इंटर प्राइजेज के मालिक को गिरफ्तर किया है. डिप्टी मैनेजर का नाम उमर इकबाल और हिमालयन इंटरप्राइजेज के मालिक का नाम उमर अहमद डार है. दोनों ही पुलवामा के रहने वाले हैं.
सीबीआई ने जांच में पाया कि साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर दिल्ली के एक Senior Citizen से 1.60 करोड़ रुपये की ठगी की थी. यह रकम हिमालयन इंटरप्राइजेज के खाते में ट्रांसफर किया गया था. इसके बाद इस पैसे की निकासी कर ली गयी थी. हिमालयन इंटरप्राइजेज ने सुनियोजित साजिश के तहत अपना अकाउंट साइबर अपराधियों को इस्तेमाल करने के लिए दिया था.
Axis Bank के डिप्टी मैनेजर ने बैंकिंग के नियमों का उल्लंघन करते हुए इस खाते के संचालन और पैसों की निकासी में मदद की थी. इसके बदले में डिप्टी मैनेजर को पैसा मिला था. सीबीआई ने मामले की जांच के दौरान दोनों को गिरफ्तार किया था. ठगी के इस मामले की जांच के बाद सीबीआई ने दिल्ली के विशेष न्यायाधीश की अदालत में इन दोनों के खिलाफ आरोप पत्र दायार किया.
उल्लेखनीय है कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर अपराधियों ने इस Senior Citizen को कई दिनों तर डिजिटल अरेस्ट कर घर में रखा था. इस दौरान उनके द्वारा गंभीर अपराध करने का आरोप लगाया. साथ ही बचाने के लिए सीबीआई और ईडी के अफसर बन कर पैसे मांगे. गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर Senior Citizen से पैसे वसूले. साइबर अपराधियों ने ठगी के लिए न्यायालय के फर्जी आदेश बना कर Senior Citizen को भेजा.
ठगी के पता लगने के बाद उन्होंने स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी थी. लेकिन पुलिस की जांच में किसी तरह की प्रगति नहीं होने के बाद Senior Citizen ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के बाद इस मामले की जांच की जिम्मेवारी सीबीआई को दे दी थी. इसके बाद दिल्ली सीबीआई ने ठगी के इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरु की थी.
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