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चतरा : नर्सिंग होम कुन्ती हरि सेवा सदन पर अनियमितता का आरोप, प्रशासन उदासीन

चतरा शहर के बस स्टैंड के समीप स्थित निजी नर्सिंग होम ‘कुन्ती हरि सेवा सदन’ एक बार फिर गंभीर अनियमितताओं के कारण जांच के दायरे में आ गया है. हैरानी की बात यह है कि बिना डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ के संचालन के बावजूद इस नर्सिंग होम को क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट का रिन्यूवल प्रमाण पत्र मिल चुका है, जिससे स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
 

Chatra: चतरा शहर के बस स्टैंड के समीप स्थित निजी नर्सिंग होम ‘कुन्ती हरि सेवा सदन’ एक बार फिर गंभीर अनियमितताओं के कारण जांच के दायरे में आ गया है. हैरानी की बात यह है कि बिना डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ के संचालन के बावजूद इस नर्सिंग होम को क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट का रिन्यूवल प्रमाण पत्र मिल चुका है, जिससे स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

 

सूत्रों के अनुसार, सदर अस्पताल से रेफर एक मरीज को देर शाम कुन्ती हरि सेवा सदन लाए जाने की सूचना प्रशासन को मिली थी. इसके बाद अनुमंडल पदाधिकारी ने टास्क फोर्स को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया, लेकिन टीम के मौके पर पहुंचने में काफी विलंब हुआ. आरोप है कि इसी दौरान नर्सिंग होम संचालक को मरीज को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का समय मिल गया.

 

निरीक्षण के लिए पहुंची टास्क फोर्स टीम में सदर थाना प्रभारी, अंचल अधिकारी और सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ पंकज कुमार शामिल थे. टीम के पहुंचने पर नर्सिंग होम अंदर से बंद पाया गया. ताला खुलने के बाद अंदर जांच करने पर एक भी डॉक्टर या नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं मिला. हालांकि बड़ी मात्रा में दवाएं, ऑपरेशन थिएटर और सर्जिकल उपकरण पाए गए. पूछताछ में संचालक ने स्वीकार किया कि वर्तमान में कोई सर्जन उपलब्ध नहीं है. 

 

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि नर्सिंग होम के पास क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट का रिन्यूवल प्रमाण पत्र है, जिसके आधार पर इसे वैध माना जा रहा है. लेकिन अग्निशमन सुरक्षा, बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण, ऑपरेशन थिएटर रजिस्टर, डॉक्टरों का ड्यूटी रोस्टर, मरीज रजिस्टर और सीसीटीवी जैसे अनिवार्य मानकों की मौके पर जांच नहीं की गई.

 

महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि करीब एक वर्ष पूर्व राज्य स्तरीय जांच टीम ने निरीक्षण के बाद कुन्ती हरि सेवा सदन को सील करने का निर्देश दिया था. इसके बावजूद नर्सिंग होम का संचालन जारी रहना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारियों के स्थानांतरण के बाद अवैध नर्सिंग होम संचालकों का मनोबल बढ़ा है और बिना संसाधन वाले संस्थानों को भी रिन्यूवल दिया जा रहा है. अब जिलेवासियों की नजर उपायुक्त कीर्ति श्री पर टिकी है. लोगों की मांग है कि नियमों का सख्ती से पालन हो और केवल मानकों को पूरा करने वाले नर्सिंग होम को ही संचालन की अनुमति दी जाए, ताकि आम जनता की जान के साथ खिलवाड़ न हो.

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