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चतरा : सादे कपड़ों में राजपुर थाना क्षेत्र पहुंची गिद्धौर पुलिस, युवक को जबरन उठाने का आरोप

जिले के राजपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बिंधानी गांव में शनिवार को उस समय अचानक हड़कंप मच गया, जब एक नीले रंग की बलेनो कार (JH02BF3806) से पहुंचे चार लोगों ने एक युवक को जबरन उठाकर गाड़ी में बिठाने का प्रयास किया. कार सवार लोगों द्वारा खुद को गिद्धौर थाना पुलिस बताते हुए एक युवक को जबरन उठाने की कोशिश की गई.
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  • प्राइवेट कार और संदिग्ध ड्राइवर, क्या नियमों को ताक पर रख काम करते हैं गिद्धौर थाना प्रभारी
  • शिवा यादव पर पहले भी लग चुके है कई गंभीर आरोप

Chatra : जिले के राजपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बिंधानी गांव में शनिवार को उस समय अचानक हड़कंप मच गया, जब एक नीले रंग की बलेनो कार (JH02BF3806) से पहुंचे चार लोगों ने एक युवक को जबरन उठाकर गाड़ी में बिठाने का प्रयास किया. कार सवार लोगों द्वारा खुद को गिद्धौर थाना पुलिस बताते हुए एक युवक को जबरन उठाने की कोशिश की गई.

 

बताया जा रहा है कि गांव के संदीप दांगी नामक युवक को बिना किसी स्पष्ट पहचान या आधिकारिक प्रक्रिया के कार में बैठाने का प्रयास किया गया था. परिजनों ने जब इसका विरोध किया और पहचान पूछी, तो युवक पर ड्रग्स कारोबार का आरोप लगाते हुए कथित तौर पर कार सवार लोगों द्वारा मारपीट कर जख्मी भी कर दिया गया. जिसके बाद घटना के दौरान शोर सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे.

 

ग्रामीणों के विरोध के बाद सहमे थाना प्रभारी पहले इधर उधर फोन करने लगे, फिर जब विरोध बढ़ता दिखा और ग्रामीण थाना प्रभारी के करतूतों का वीडियो बनाने लगे तो थानेदार अपने प्राइवेट लोगों के साथ वहां से फरार हो गए. इस पूरी घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर जहां गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं, वहीं पुलिस की क्षवी भी धूमिल की है!

 

इस मामले में कई अहम सवाल उभर कर सामने आ रहे हैं

पहला सवाल

जो व्यक्ति खुद को ड्राइवर बता रहा था, क्या वह वास्तव में पुलिस विभाग से जुड़ा हुआ है या थाना प्रभारी का दलाल निजी व्यक्ति है.

दूसरा सवाल

बिंधानी गांव का इलाका राजपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है, ऐसे में क्या गिद्धौर पुलिस ने स्थानीय थाना को इस कार्रवाई की पूर्व सूचना दी थी. 

तीसरा सवाल

अगर राजपुर थाना पुलिस को गिद्धौर पुलिस के कार्रवाई की पूर्व सूचना थी, तो क्या थाना में स्टेशन डायरी एंट्री की गई.

चौथा सवाल

आखिर ऐसी कौन सी परिस्थिति उत्पन्न हो गई कि थाना प्रभारी को पुलिस के जवानों को छोड़ और वर्दी के बिना प्राइवेट लोगों के साथ छापेमारी के लिये जाना पड़ा.

सबसे बड़ा सवाल

आखिर प्राइवेट वाहन और सादे कपड़ों में निजी लोगों के साथ छापेमारी जैसी कार्रवाई किस नियम के तहत थाना प्रभारी द्वारा अंजाम दिया गया.

ग्रामीणों का आरोप है कि संदीप दांगी सितंबर 2025 से कोलकाता स्थित नेशनल ट्रेनिंग स्किल इंस्टीट्यूट, हावड़ा में CITS (क्राफ्ट इंस्ट्रक्टर ट्रेनिंग स्कीम) का कोर्स कर रहा है. वह चतरा जिले में चल रही होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के लिए 20 मार्च को ही अपने गांव आया था. इससे यह भी सवाल खड़ा होता है कि क्या जिस युवक पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, उसकी पृष्ठभूमि और गतिविधियों की आनन-फानन में कार्रवाई से पूर्व सही तरीके से जांच क्यूं नहीं की गई?

 

इस तरह की घटनाएं न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती हैं, बल्कि आम लोगों के मन में डर और अविश्वास भी पैदा करती हैं. ऐसे में जरूरत है कि पूरे मामले की किसी वरीय अधिकारी की निगरानी में निष्पक्ष तरीके से जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषी थाना प्रभारी व सफेदपोशो पर कार्रवाई हो.

 

शिवा यादव का पूर्व से है विवादों से नाता

ऐसा नहीं है कि गिद्धौर थाना प्रभारी शिवा यादव पर इस तरह का संगीन व गैरकानूनी कृत कार्य करने का आरोप पहली बार लगा हो. इससे पूर्व भी थाना प्रभारी पर ग्रामीण से पैसे लेकर थाना से अफीम तस्कर को छोड़ने, मवेशी चोरी और तस्करी में अपनी संलिप्तता स्वीकार करने वाले पशु तस्कर को भी पैसे लेकर छोड़ने का आरोप लग चुका है. जिसकी शिकायत कई बार ग्रामीण स्तर से वरिय अधिकारियों को दी जा चुकी है. बावजूद थाना प्रभारी पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं होना सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़ा करता है.

 

एसपी नें दिये जांच के आदेश, एसडीपीओ को मिला जिम्मा

बहरहाल इस पूरे मामले का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद एसपी सुमित कुमार अग्रवाल ने इसे गंभीरता से लिया है. उन्होंने घटना की जांच करने का आदेश सिमरिया एसडीपीओ शुभम खंडेलवाल को दे दिया है. एसपी ने कहा कि भ्रष्टाचार और नियम विरुद्ध कार्यशैली किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी थाना प्रभारी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी. हालांकि थाना प्रभारी नें मामले में खुद को निर्दोष बताया है.

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