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Chatra News : जमीन रजिस्ट्री में फर्जीवाड़ा ! सब रजिस्ट्रार और ऑपरेटर आमने-सामने

Chatra News : कंप्यूटर ऑपरेटर विकास ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुए भूमि निबंधन को बड़ी गड़बड़ी बताते हुए कहा कि पूरे मामले में उसे मोहरा बनाया जा रहा है.
 
फाइल फोटो.
  • दस्तावेजों की जांच को लेकर अलग-अलग दावे
  • सवालों के घेरे में निबंधन कार्यालय

Chatra News : झारखंड के चतरा शहर में कथित फर्जी होल्डिंग, वंशावली और पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर एक ही दिन सात जमीनों की रजिस्ट्री का मामला तूल पकड़ने लगा है. करोड़ों की बेशकीमती जमीन के निबंधन में हेराफेरी को लेकर निबंधन कार्यालय की कार्यशैली सवालों के घेरे में है. वहीं सब रजिस्ट्रार और ऑपरेटर के अलग-अलग बयानों ने मामले को और पेचीदा बना दिया है.

 

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बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस सनसनीखेज हेराफेरी का मास्टरमाइंड कौन है? क्या सब रजिस्ट्रार संतोष रजक ने जानबूझकर नियमों की अनदेखी की या फिर इस पूरे गड़बड़झाले में कंप्यूटर ऑपरेटर विकास की भूमिका संदिग्ध है?


जिला अवर निबंधन पदाधिकारी (सब रजिस्ट्रार) संतोष रजक के अनुसार, जमीन की सभी सात रजिस्ट्री से पहले ऑपरेटर द्वारा दस्तावेजों की जांच की गई. वहीं, कंप्यूटर ऑपरेटर विकास ने अपनी सफाई में कहा कि उसने ऑनलाइन उपलब्ध खतियान और पंजी टू के आधार पर ही दस्तावेजों का सत्यापन किया था. पंजी टू और खतियान समेत केवाला में दर्ज अन्य सभी दस्तावेजों की जांच की जिम्मेदारी कार्यालय के प्रधान सहायक और सब रजिस्ट्रार की होती है.


कंप्यूटर ऑपरेटर विकास ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुए भूमि निबंधन को बड़ी गड़बड़ी बताते हुए कहा कि पूरे मामले में उसे मोहरा बनाया जा रहा है. यदि सबकुछ ऑपरेटर ही रहता और करता है, तो फिर जेपीएससी पास कर सब रजिस्ट्रार की कुर्सी पर अधिकारी क्यों बैठे हैं ? क्या उनकी कोई जिम्मेवारी नहीं बनती है. ऐसे में ऑपरेटर और सब रजिस्ट्रार दोनों के अलग-अलग दावों ने निबंधन कार्यालय की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.


सीओ से सीएम तक की गई फर्जीवाड़े की शिकायत

इधर, शिकायतकर्ता राहुल देव और नीरज सिंहा नें संयुक्त रूप से अंचल अधिकारी, एसडीओ, भूमि सुधार उपसमाहर्ता, अपर समाहर्ता, डीसी, आयुक्त, मुख्य सचिव, विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री को आवेदन देकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निबंधित भूमि के म्यूटेशन आवेदन निरस्त करते की मांग की है. साथ ही केवाला को अवैध बताते हुए उसे रद्द करने की अपील की है. केवाला में वार्णित तथ्यों और दातावेजों के जांच की भी मांग की है. ताकि भू-माफियाओं और उसके संरक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके. 


एक ही होल्डिंग के दो मालिक, बैंक ब्येरा में भी गड़बड़झाले पर रजिस्ट्रार नें लगा दी मुहर

गौरतलब है कि शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उनकी खतियानी जमीन पर गिद्ध नजर जमाए भू-माफियाओं ने पहले किसी महिला को नगर परिषद द्वारा निर्गत होल्डिंग रसीद में कथित छेड़छाड़ कर फर्जी दस्तावेज तैयार किया फिर उसके आधार पर दूसरे जिले में गलत तरिके से पावर ऑफ अटॉर्नी ली और पुनः चतरा में जमीन की अवैध रजिस्ट्री कर दी. शिकायत के अनुसार रजिस्ट्री में प्रस्तुत नगर परिषद से निर्गत रसीद संख्या 269558611072025062417 और होल्डिंग संख्या 0070000861000A3 सत्येंद्र कुमार सिन्हा के नाम पर 11 जुलाई 2025 को निर्गत दिखाई गई है. जबकि इसी रसीद संख्या 269558611072025062417 में ही होल्डिंग संख्या 0200000861000A3 वार्ड 20 की निवासी फूलवा देवी के नाम पर पूर्व से दर्ज है. दोनों रसीदों में राजस्व राशि और राजस्व वर्ष समान होने का दावा किया गया है.


 आरोप है कि फुलवा देवी के नाम पर निर्गत होल्डिंग रशीद में कुटरचना कर जमीन माफियाओं और विक्रेता द्वारा नाम और होल्डिंग संख्या के कुछ नंबर बदल दिये गए हैं. जिसके बाद रजिस्ट्रार और अन्य कार्यालय कर्मियों से मिलीभगत कर अलग-अलग दस्तावेजों के आधार पर एक ही दिन में सात रजिस्ट्री करा दी गईं. आरोपों के मुताबिक, वंशावली वार्ड छह के पार्षद दीपक कुमार वर्मा के लेटरहेड पर जारी किया गया है. जबकि प्रस्तुत दस्तावेज में दर्ज कागजों के अनुसार संबंधित जमीन वार्ड छह के अंतर्गत आता है और ना ही जमीन की रजिस्ट्री करने वाले सत्येंद्र कुमार सिंहा ही वार्ड छह के निवासी हैं. रजिस्ट्री में प्रस्तुत होल्डिंग भी वार्ड सात का है.


आरोप है कि वार्ड पार्षद नें अपने करीबियों और रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने की नियत से कानून को ताक पर रखकर नियम विरुद्ध फर्जी वंशावली निर्गत की. जिसको आधार बनाकर उनके करीबी और रिश्तेदारों के नाम पर अवैध तरिके से जमीन का पॉवर ऑफ अटॉर्नी और रजिस्ट्री को अंजाम दिया गया है.


प्रथम दृष्टया दस्तावेज फर्जी: अपर समाहर्ता

इधर, अपर समाहर्ता अरविंद कुमार ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया भूमि निबंधन में प्रस्तुत दस्तावेज पूरी तरह फर्जी प्रतीत हो रहे हैं. सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़ कर जमीन का निबंधन कराने के मामले में निबंधन कार्यालय की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वार्ड छह के पार्षद को संबंधित मामले में वंशावली जारी करने का अधिकार भी नहीं था. जांच के बाद दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी. वहीं, डीसी रवि आनंद ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कमेटी गठित कर पूरे प्रकरण की जांच का निर्देश दिया है. 


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