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Chatra News: जमीन माफियाओं के खेल में सिस्टम हुआ फेल! फर्जी दस्तावेजों से जमीन की रजिस्ट्री

Chatra News: जमीन मालिक शहर के दीभा मोहल्ला निवासी नीरज सिन्हा और राहुल देव ने कथित फर्जी दस्तावेज, होल्डिंग में छेड़छाड़ और लाखों रुपये के लेन-देन के आरोप लगाते हुए रजिस्ट्री कार्यालय के कर्मियों और सब रजिस्ट्रार संतोष रजक की भूमिका पर सवाल उठाए हैं.
 

Chatra News: जमीन एक वार्ड की, विक्रेता दूसरे इलाके का, होल्डिंग किसी तीसरे व्यक्ति के नाम और कथित अधूरे वंशावली जारी करने वाला पार्षद भी दूसरे वार्ड का. इसके बावजूद चतरा में एक ही तारीख को सात जमीनों की रजिस्ट्री हो जाने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है. 


जमीन मालिक शहर के दीभा मोहल्ला निवासी नीरज सिन्हा और राहुल देव ने कथित फर्जी दस्तावेज, होल्डिंग में छेड़छाड़ और लाखों रुपये के लेन-देन के आरोप लगाते हुए रजिस्ट्री कार्यालय के कर्मियों और सब रजिस्ट्रार संतोष रजक की भूमिका पर सवाल उठाए हैं.


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किसने खेला फर्जीवाड़े का खेल ?

जमीन मालिकों का आरोप है कि दीभा मोहल्ला में उनकी खतियानी जमीन पर गिद्ध नजर जमाए भू-माफियाओं ने पहले किसी महिला को नगर परिषद द्वारा निर्गत होल्डिंग रसीद में कथित छेड़छाड़ कर फर्जी दस्तावेज तैयार किया. फिर उसके आधार पर दूसरे जिले में गलत तरिके से पावर ऑफ अटॉर्नी ली और पुनः चतरा में जमीन की अवैध रजिस्ट्री कर दी. 

 

एक ही रशीद से दो-दो होल्डिंग

जमीन मालिक के अनुसार रजिस्ट्री में प्रस्तुत रसीद संख्या 269558611072025062417 और होल्डिंग संख्या 0070000861000A3 सत्येंद्र कुमार सिन्हा के नाम पर 11 जुलाई 2025 को निर्गत दिखाई गई है. जबकि इसी रसीद संख्या 269558611072025062417 में ही होल्डिंग संख्या 0200000861000A3 वार्ड 20 की निवासी फूलवा देवी के नाम पर पूर्व से दर्ज है. दोनों रसीदों में राजस्व राशि और राजस्व वर्ष समान होने का दावा किया गया है. 

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आरोप है कि फुलवा देवी के नाम पर निर्गत होल्डिंग रशीद में साजिश कर जमीन माफियाओं ने नाम और होल्डिंग संख्या के कुछ नंबर बदल दिये गए हैं. सरकारी दस्तावेज से छेड़छाड़ कि पुष्टि नगर परिषद के टैक्स विभाग ने भी की है. 


इतना ही नहीं आरोप यह भी है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दूसरे जिले में जमीन का अवैध पावर ऑफ अटॉर्नी लिया गया. इसके बाद चतरा निबंधन कार्यालय में एक ही दिन अलग-अलग दस्तावेजों के आधार पर सात रजिस्ट्री करा दी गईं.

 

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जमीन मालिकों के मुताबिक, वंशावली वार्ड छह के पार्षद दीपक कुमार वर्मा के लेटरहेड पर जारी किया गया है. जबकि प्रस्तुत दस्तावेज ना तो वार्ड छह के अंतर्गत आता है और ना ही जमीन कि रजिस्ट्री करने वाले सत्येंद्र कुमार सिंहा ही वार्ड छह के निवासी हैं. इतना ही नहीं रजिस्ट्री में प्रस्तुत होल्डिंग वार्ड सात का है. 


आरोप है कि वार्ड पार्षद ने अपने करीबियों और रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के नियत से कानून को ताक पर रखकर नियम विरुद्ध फर्जी वंशावली निर्गत किया है. जिसको आधार बनाकर उनके करीबी और रिश्तेदारों के नाम पर अवैध तरीके से जमीन का पॉवर ऑफ अटॉर्नी और रजिस्ट्री किया गया है.

 

शिकायत के बावजूद कैसे हुई रजिस्ट्री?

सबसे गंभीर सवाल यह है कि जमीन मालिकों ने पहले ही सब रजिस्ट्रार, सीओ, एसडीओ, एलआरडीसी, अपर समाहर्ता और उपायुक्त को लिखित शिकायत देकर संभावित फर्जीवाड़े की जानकारी दी थी. इसके बावजूद रजिस्ट्री कैसे हुई? शहर के महंगे जमीन का निबंधन से पूर्व प्रस्तुत दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं किया गया ? अब अवैध म्यूटेशन के लिए भी आवेदन किए जाने का आरोप है. 


जमीन मालिक का आरोप है कि रजिस्ट्री ऑफिस और अंचल कार्यालय के अधिकारियों से मिली भगत कर भू-माफियाओं ने षड्यंत्र रचा. उन्होंने बताया कि मामले कि जानकारी डीसी, एसी, एलआरडीसी, एसडीओ व अंचल अधिकारी समेत संबंधित वरीय अधिकारियों को आगे की कार्रवाई के लिए लिखित तौर पर किया हूं. 


उन्होंने बताया कि जरूरत पड़ी तो मामले को लेकर निबंधन कार्यालय के संबंधित अधिकारी, कर्मी, क्रेता-विक्रेता समेत मामले में सम्मिलित भू-माफियाओं व अन्य के विरुद्ध सरकारी दस्तावेजों में छेड़छाड़, कूट रचना समेत जालसाजी की प्राथमिकी भी दर्ज कराएंगे. 

 

कौन है सत्येंद्र कुमार सिंहा ?

जमीन मालिक राहुल देव के अनुसार सत्येंद्र कुमार सिंहा उर्फ सतन लाल उनके गोतिया हैं. वर्तमान में यह शहर के अव्वल मोहल्ला इलाके में रहते हैं. राहुल देव के अनुसार पूर्व में ही सतन लाल के परिवार को उनके हिस्से कि जमीन दी जा चुकी है, जिससे उनकी मां ने कई लोगों को जमीन बेचीं भी थी. 


वर्ष 2004 और उससे पूर्व सत्येंद्र कुमार सिन्हा की मां राम कुमारी देवी ने अपने हिस्से की कुछ जमीन मेरे वंशजों के नाम पर लिख दी थी. जिसमें सत्येंद्र कुमार सिंहा का भी बतौर गवाह हस्ताक्षर है. जिसके आधार पर वर्तमान में न सिर्फ संबंधित जमीन पर उनका संपूर्ण कब्जा है, बल्कि उसमें वह फसल का उत्पादन भी कर रहे हैं. इसके अलावा जमीन का लगान रसीद भी निर्गत होता आ रहा है. 


राहुल देव ने बताया कि सत्येंद्र कुमार सिंहा नें किन परिस्थितियों में नियमों को ताक पर रखकर फर्जी दस्तावेज के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री अवैध तरीके से गुपचुप तरीके से किया है यह समझ से परे है.

 

जांच के बाद होती रजिस्ट्री : निबंधन पदाधिकारी

इस पूरे मामले में अवर निबंधन पदाधिकारी संतोष रजक ने कहा कि बगैर दस्तावेज जांच का कोई भी रजिस्ट्री नहीं होता है. कार्यालय स्तर पर निबंधन से पूर्व भूमि संबंधित दस्तावेजों कि गहनता से जांच की जाती है. अगर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कार्यालय को गुमराह कर जमीन कि रजिस्ट्री कराई गई है तो मामला गंभीर है. मैं दस्तावेजों का अवलोकन कर विशेष जानकारी दे पाऊंगा. पैसे के लेनदेन और भ्रष्टाचार के आरोप बेबुनियाद है. जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करूंगा.

 

SIR के नाम पर बनवाया गया वंशावली: वर्मा

इधर वार्ड नंबर छह के पार्षद दीपक कुमार वर्मा ने बताया कि सत्येंद्र कुमार सिंहा ने SIR में नाम देने के नाम पर वंशावली बनाने कि बात कही थी. उनके द्वारा दिये गये खतियान देखकर मैंने वंशावली बना दिया था. इसके अलावा किसी मामले में मेरी कोई भूमिका नहीं है. मैं पूर्व से जानता हूं कि ये दीभा मोहल्ला में आते-जाते रहे हैं.

हरहाल में होगी कार्रवाई : अपर समाहर्ता

वहीं अपर समाहर्ता अरविंद कुमार ने मामले को गंभीर बताया है. उन्होंने कहा कि फिलहाल विभागीय कार्य को लेकर मुख्यालय से बाहर हैं. शनिवार को चतरा लौटते ही प्रस्तुत दस्तावेजों का अवलोकन कर मामले की जांच कराते हुए दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होगी. उन्होंने कहा है कि जमीन मालिक की ओर से पहले ही ऐसी गड़बड़ी का संदेह व्यक्त करते हुए कार्रवाई करने के लिए पत्र मिल चुका है. जिसे आगे की कार्रवाई के लिए अंचल कार्यालय और निबंधन पदाधिकारी को भेजा गया था.

 

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