Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

Bokaro News: छऊ कलाकर परीक्षित महतो की सरकार से मांग, मुखौटा रखने को मिले भवन

झारखंड का प्रसिद्ध छऊ नाच जिसे यूनेस्को द्वारा अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के तौर पर मान्यता मिली हुई है, वो लगातार उपेक्षा का शिकार हो रहा है.
Advertisement
Advertisement

Bokaro : झारखंड का प्रसिद्ध छऊ नाच जिसे यूनेस्को द्वारा अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के तौर पर मान्यता मिली हुई है, वो लगातार उपेक्षा का शिकार हो रहा है. इसी क्रम में बोकारो जिले के चंदनकियारी प्रखंड स्थित खेड़ाबेड़ा गांव के रहने वाले छऊ नर्तक परीक्षित महतो इस नृत्य शैली को बचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं. उनके इस योगदान के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से पुरस्कृत किया था. इसके बावजूद छऊ कलाकारों को जितना नाम, पैसा मिलना चाहिए था, वो नहीं मिल रहा है. अब नये युवा इस पारंपरिक रूप से इस नृत्य शैली को नहीं अपनाना चाहते हैं.  

 

परीक्षित महतो नई पीढ़ी के युवाओं को इस ऐतिहासिक नृत्य शैली की बारीकियां और तकनीकी ज्ञान पूरी शिद्दत से सिखा रहे हैं, ताकि पूर्वजों की यह अनमोल धरोहर समय के थपेड़ों में कहीं खो न जाए. इसके इतर वो आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं. उन्होंने सरकार से अपने वाद्ययंत्र और छऊ मुखौटा रखने के लिए एक समर्पित भवन की मांग की है. जिससे राज्य की अमूल्य विरासत को संजोकर रखा जा सके.

 

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही