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चोकसी की अपील खारिज, कोर्ट ने कहा, भारत में किये गये अपराध बेल्जियम में भी दंडनीय, भारत लाने का रास्ता साफ

कोर्ट के अनुसार विदेशी नागरिक चोकसी को 1874 के बेल्जियम प्रत्यर्पण अधिनियम के तहत प्रत्यर्पण का सामना करना पड़ेगा. अहम बात यह है कि पिछले सप्ताह  एंटवर्प(बेल्जियम) के कोर्ट ने चोकसी के भारत प्रत्यर्पण पर मुहर लगा दी थी.  कोर्ट ने बेल्जियम पुलिस द्वारा की गयी उसकी गिरफ़्तारी को वैध माना था.
 

New Delhi :  भारत के भगौड़े हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी को बेल्जियम के एक कोर्ट ने करारा झटका दिया है. प्रत्यर्पण के खिलाफ चोकसी की अपील खारिज कर दी है. कोर्ट ने कहा कि मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण मामले में भारत में किये गये अपराध  बेल्जियम के कानून के तहत भी अपराध माने जायेंगे.

 

कोर्ट के अनुसार विदेशी नागरिक चोकसी को 1874 के बेल्जियम प्रत्यर्पण अधिनियम के तहत प्रत्यर्पण का सामना करना पड़ेगा. अहम बात यह है कि पिछले सप्ताह  एंटवर्प(बेल्जियम) के कोर्ट ने चोकसी के भारत प्रत्यर्पण पर मुहर लगा दी थी.  कोर्ट ने बेल्जियम पुलिस द्वारा की गयी उसकी गिरफ़्तारी को वैध माना था. 

 


मामला यह कि लगभग 66 साल के चोकसी को भारतीय अधिकारियों के आग्रह पर 11 अप्रैल को एंटवर्प पुलिस ने गिरफ़्तार किया था. उसके बाद से वह बेल्जियम की एक जेल में है.  उसने कई बार ज़मानत याचिकाएं दायर की, लेकिन ने सभी इस आधार पर खारिज कर दी कि उसके भागने का खतरा है. 


इसी 17 अक्टूबर को कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि भारतीय अधिकारियों द्वारा लिस्टेड अपराध, जिनमें आपराधिक षडयंत्र, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार शामिल हैं, बेल्जियम में भी अपराध है, दोनों देशों के कानूनों के तहत एक साल से ज्यादा कारावास की सजा का प्रावधान है.


 कोर्ट ने कहा कि कथित अपराध 2016 के अंत  और 2019 की शुरुआत के बीच भारत में किये गये. कहा कि. बेल्जियम में इन अपराधों के लिए एक साल से ज्यादा जेल की सजा का प्रावधान है.   हालांकि कोर्ट ने सभी आरोपों को मान्यता नहीं दी है.


  
अदालत ने एक बात और कही. कहा कि अपराध के साक्ष्यों के गायब होने के संदर्भ में बताये गये और भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 201 के तहत दंडनीय प्रत्यर्पण अनुरोध में संलग्न तथ्यों को बेल्जियम में आपराधिकनहीं माना गया है.  


एंटवर्प अदालत के अनुसार इस बात का भी कोई सबूत सामने नहीं आया कि कि मेहुल चोकसी को लेकर भारत का प्रत्यर्पण अनुरोध उसकी जाति, धर्म, राष्ट्रीयता या राजनीतिक संबद्धता के आधार पर मुकदमा चलाने या उसे दंडित करने के इरादे से किया गया था.  

 

अदालत को यह सबूत भी नहीं मिला कि  चोकसी का अपहरण भारतीय अधिकारियों के निर्देश पर किया गया था.  कोर्ट ने यह भी नहीं माना कि  प्रत्यर्पित होने पर उसे (चोकसी) राजनीतिक मुकदमे का सामना करना पड़ेगा.


  
 चोकसी पंजाब नेशनल बैंक में 13,000 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी के लिए वॉन्टेड है. उसने अपने भतीजे नीरव मोदी के साथ मिलीभगत से स्कैम  किया. सीबीआई का आरोप है कि 13 हजार करोड़ रुपये में चोकसी ने अकेले 6,400 करोड़ रुपये डकारे.  


 
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