- हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा की रद्द
- बच्चे की गवाही में विरोधाभास और हत्या में प्रत्यक्ष भूमिका साबित नहीं हुई
Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने करीब 30 साल पुराने हत्या के मामले में दोषी ठहराये गये चोपल साव को बरी कर दिया है. अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ हत्या का आरोप संदेह से परे साबित करने में विफल रहा. अदालत ने हजारीबाग के पांचवें अपर सत्र न्यायाधीश द्वारा 17 जून 1998 को सुनायी गयी दोषसिद्धि और 18 जून 1998 को दी गयी उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया.
मामला हजारीबाग जिले के बड़कागांव थाना क्षेत्र के पंकरी बरवाडीह गांव का है. दो नवंबर 1995 को झमन साव का शव उनके घर में मिला था. मृतक के पुत्र लुकन साव के बयान पर चोपल साव और उनके पिता नीचा साव के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. आरोप था कि जमीन विवाद को लेकर नीचा साव ने झमन साव को कमरे में धकेला था, जबकि चोपल साव दरवाजे पर खड़ा था. बाद में मृतक के गले में प्लास्टिक की रस्सी का निशान मिला था.
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11 वर्षीय बच्चे की गवाही पर टिका था मामला
अभियोजन पक्ष ने मामले में कुल 15 गवाह पेश किये थे. इनमें मृतक के 11 वर्षीय पुत्र महाबीर कुमार साव को घटना के एक हिस्से का प्रत्यक्षदर्शी बताया गया था. उसने अदालत में कहा था कि घटना के दिन स्कूल से घर लौटने पर उसने अपने चाचा नीचा साव को पिता को घर के अंदर धकेलते देखा था, जबकि चोपल साव दरवाजे पर खड़ा था. हालांकि उसने हत्या होते हुए स्वयं देखने की बात नहीं कही थी. हाईकोर्ट ने गवाह महाबीर के बयान और अनुसंधान पदाधिकारी के साक्ष्य का विश्लेषण करते हुए कई महत्वपूर्ण विरोधाभास पाये.
दरवाजे पर खड़े रहने से हत्या में संलिप्तता साबित नहीं
खंडपीठ ने कहा कि चोपल साव के खिलाफ मुख्य आरोप केवल इतना था कि वह घटना के समय दरवाजे पर खड़ा था. उसके द्वारा मृतक को रस्सी से बांधने या गले में फंदा लगाने जैसी किसी प्रत्यक्ष कार्रवाई का विश्वसनीय साक्ष्य नहीं मिला. केवल घटनास्थल पर मौजूद रहने या मृतक के साथ जमीन विवाद होने से हत्या में संलिप्तता साबित नहीं होती.
अदालत ने यह भी कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 34 के तहत सामूहिक दायित्व तय करने के लिए यह साबित करना जरूरी है कि आरोपी ने साझा मंशा से अपराध किया या उसमें सहयोग दिया. मौजूदा मामले में चोपल साव की साझा मंशा और हत्या में उसकी भागीदारी विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित नहीं हुई.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के गले पर रस्सी का निशान पाया गया था और डॉक्टर ने दम घुटने से मौत होने की बात कही थी. हालांकि अदालत के अनुसार, चिकित्सा साक्ष्य मौत के कारण की पुष्टि तो करते हैं, लेकिन चोपल साव को हत्या से जोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं हैं.
संदेह का लाभ आरोपी को मिला
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आपराधिक मामलों में अभियोजन पक्ष को आरोप संदेह से परे साबित करना होता है. यदि साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की संलिप्तता को लेकर उचित संदेह बना रहता है, तो उसका लाभ आरोपी को दिया जाना चाहिए.
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