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ईसाई समुदाय का चालीसा काल शुरू, माथे पर तिलक लगा यीशु किए गए याद

Ranchi: ईसाई समुदाय का आज से चालीसा काल शुरू हुआ. चर्चों में विशेष अनुष्ठान हुआ. यीशु मसीह के दुख भोग को याद किया गया. शहर के विभिन्न चर्चो जीईएल चर्च,सीएनआई और रोमन कैथोलिक समेत अन्य चर्चो में विशेष आराधना हुई. इसमें हजारों विश्वासियों का जनसैलाब देखने को मिला. पुरोहितों द्वारा खजूर के डाली से बने राख को विश्वासियों के माथे पर लगाया गया ताकि यीशु मसीह के दुख भोग को याद किया जा सके.


विश्वासियों ने बताया कि चालीसा काल में मनुष्य अपनी पुरानी आदतों और बातों को भूलकर एक नये राह पर चलने की कोशिश करते हैं. क्योंकि मानव से भूल हो ही जाती है. छोटी बड़ी गलतियों से छुटकारा पाने के लिए चालीसा काल में उपवास में रहा जाता है. जिससे पापों का प्रायश्चित होता है.  चालीसा काल में जीवन को पूर्ण रूप से यीशु मसीह का स्मरण करते हैं.

 


जानें यीशु मसीह का पहला से लेकर चौदहवें घटना तक 

 

पहली घटना यीशु को प्राणदण्ड की आज्ञा मिलती है. दूसरा स्थान पर यीशु के कंधे पर क्रूस लादा जाता है. तीसरे स्थान पर यीशु पहली बार क्रूस के नीचे गिरते हैं. चौथे स्थान पर यीशु और उनकी दुखी मां की भेंट होती है. पांचवें स्थान पर सिरिनी सिमोन क्रूस ढोने में य़ीशु को सहायता करते हैं. छठवे स्थान पर बेरोनिका यीशु का चेहरा पोंछती है. 


सातवें स्थान पर यीशु दूसरी बार गिरते हैं. आठवें स्थान पर येरूसलेम की स्त्रियां यीशु के लिए रोती कलपती हैं. नवें स्थान पर यीशु तीसरी बार गिरते हैं. दसवें स्थान पर यीशु के कपड़ों को उतारते हैं. ग्यारहवें स्थान पर यीशु क्रूस पर ठोके जाते हैं. बारहवे स्थान पर यीशु क्रूस पर मर जाते है. तेरहवें स्थान पर यीशु क्रूस पर से उतारे जाते है और चौदहवें स्थान पर यीशु कब्र में रखे जाते हैं.

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