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PMAY-U फ्लैट आवंटन में HC का निर्देश: 13 लाभार्थियों की आवंटन जांच खुद करें नगर आयुक्त

Ranchi: हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत हजारीबाग जिला में फ्लैटों के आवंटन को लेकर गंभीर टिप्पणी किया है. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए नगर आयुक्त हजारीबाग को विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया है. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सोनी कुमारी की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया. 


खंडपीठ ने निर्देश दिया कि हजारीबाग नगर आयुक्त स्वयं मामले के 13 प्रतिवादियों (लाभार्थियों) के फ्लैट आवंटन की जांच करेंगे. इस दौरान याचिकाकर्ता, संबंधित लाभार्थियों और आवंटन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा. 


नगर आयुक्त को छह महीने के भीतर कारणयुक्त आदेश (Reasoned Order) पारित कर सभी पक्षों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को जारी शो-कॉज नोटिस का निपटारा भी नगर आयुक्त द्वारा ही किया जाएगा. कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता के आवंटन में भी कोई अनियमितता है, तो प्रशासन कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगा. खंडपीठ ने मामले को निष्पादित कर दिया.

 

प्रधानमंत्री आवास योजना में पूर्ण पारदर्शिता आवश्यक


खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों में पूर्ण पारदर्शिता आवश्यक है और लाभ केवल वास्तविक पात्र लोगों को ही मिलना चाहिए. शिकायत मिलने पर आवंटन प्राधिकरण को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए.

 

क्या है आरोप 

 

याचिकाकर्ता सोनी कुमारी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 13 प्रतिवादियों  को दिए गए फ्लैटों का आवंटन अवैध है क्योंकि लाभार्थी योजना के पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करते. उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 से लगातार शिकायतें करने के बावजूद हजारीबाग नगर निगम प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की. 


याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि शिकायतों की अनदेखी करने के बजाय नगर आयुक्त ने उनके खिलाफ ही शो-कॉज नोटिस जारी कर दिया, जिसमें उनके आवंटन को भी गलत बताया गया.

 

कोर्ट ने समिति की जांच को बताया अविश्वसनीय


राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि शिकायतों पर एक समिति गठित की गई थी, जिसने आरोपों में कोई दम नहीं पाया. लेकिन हाईकोर्ट ने समिति की रिपोर्ट को अत्यंत अविश्वसनीय मानते हुए कहा कि यह जांच गंभीर नहीं थी और केवल एक परिवार तक सीमित रही.

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