Ranchi : झारखंड में मॉब लिंचिंग यानी भीड़ द्वारा हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. कभी बच्चा चोरी के संदेह में तो कभी डायन-बिसाही का आरोप लगाकर तो कभी पशु चोरी के आरोप में लोगों की हत्या पीट-पीटकर हत्या कर दी जा रही है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में राज्य में मॉब लिंचिंग की 10 अधिक घटनाएं हुई हैं. इन घटनाओं में 10 से अधिक लोगों की जानें गईं, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं. इन घटनाओं में शामिल होने के आरोप में अब तक 105 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है.
अफवाह और अंधविश्वास बड़ी वजह
लोगों का कहना है कि बच्चा चोरी की अफवाह, व्हाट्सएप पर फैलती अपुष्ट खबरें, अंधविश्वास और ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी ऐसी घटनाओं को बढ़ावा देती है. कई मामलों में बाद में यह सामने आया कि पीड़ितों पर लगे आरोप बेबुनियाद थे.
कानून बना, पर लागू नहीं
मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए झारखंड सरकार ने 2021 में झारखंड मॉब लिंचिंग निषेध विधेयक, 2021 पारित किया था. इस कानून में दोषियों के लिए कड़ी सजा, जुर्माना और पीड़ितों को मुआवजा देने का प्रावधान था. लेकिन यह विधेयक लागू नहीं हो पाया.
राज्य के कई जिलों में हाल के समय में भीड़ हिंसा के कई मामले सामने आए हैं
- 17 फरवरी 2025 को चतरा के पिपरवार क्षेत्र में बच्चा चोरी के शक में एक व्यक्ति की पिटाई से मौत हो गई.
- 09 मार्च 2025 को लातेहार में बकरी चोरी के शक में मजदूर की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई.
- 17 जनवरी 2026 को रांची में चोरी के शक में युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई.
- 09 मई 2025 को बोकारो में भीड़ ने एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी.
- 08 जनवरी 2025 को गोड्डा में मवेशी चोरी के आरोप में युवक की हत्या कर दी गई.
- 02 अप्रैल 2025 को चतरा के लावालौंग में लूटपाट के आरोप में युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई.
- 17 जून 2021 को गढ़वा में ओझा-गुनी के नाम पर दो लोगों को बांधकर पीटा गया, जिसमें एक की मौत हो गई.
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