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जलवायु परिवर्तन प्रकृति से टूटते रिश्तों का परिणाम: राजेद्र सिंह

‘संवाद’ के रजत जयंती समारोह के दूसरे दिन एसडीसी सभागार में विचार और संस्कृति का संगम देखने को मिला. देशभर से पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और कलाकारों ने ‘देशज गणतंत्र’ की अवधारणा पर  मंथन किया.
 

Ranchi: ‘संवाद’ के रजत जयंती समारोह के दूसरे दिन एसडीसी सभागार में विचार और संस्कृति का संगम देखने को मिला. देशभर से पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और कलाकारों ने ‘देशज गणतंत्र’ की अवधारणा पर  मंथन किया. कार्यक्रम में सेमिनार, कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए स्थानीय स्व-शासन, जलवायु संकट, आजीविका, आदिवासी संस्कृति संरक्षण और महिलाओं की भूमिका जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई.


‘जल पुरुष’ के नाम से प्रसिद्ध राजेंद्र सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन बाहरी समस्या नहीं, बल्कि प्रकृति से टूटते रिश्ते का परिणाम है. उन्होंने कहा कि भारत की परंपराएं कभी प्रकृति के साथ संतुलन का संदेश देती थीं, लेकिन आज हम उसी राह से भटक गए हैं. यदि समय रहते अपनी जड़ों की ओर नहीं लौटे, तो संकट और गहराएगा.

 

कार्यक्रम में आदिवासी कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. लोक संस्कृति की प्रस्तुति से सभागार गूंज रहा था. वहीं चित्रकला प्रतियोगिता और कवि सम्मेलन ने युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया. समारोह का विशेष आकर्षण पद्मश्री सिमोन उरांव के जीवन पर आधारित झरिया फिल्म का प्रदर्शन रहा, जिसने दर्शकों को भावुक कर दिया.


इस मौके पर समाज सेवा और रचनात्मक क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों को ‘नवाचार सम्मान’ से सम्मानित किया गया. देश के विभिन्न हिस्सों से आए, कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई.

 

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