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जनजातीय मामलों पर आयोग सख्त: आशा लकड़ा की PC में 66 मामलों की सुनवाई का खुलासा

Ranchi: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की सदस्य आशा लकड़ा ने रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर झारखंड में आयोजित तीन दिवसीय जनसुनवाई की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि आयोग ने राज्य के 10 जिलों से जुड़े कुल 66 मामलों की सुनवाई की, जिनमें आदिवासियों की जमीन, सेवा विवाद, चिकित्सा लापरवाही और पुलिस की भूमिका जैसे गंभीर मुद्दे शामिल थे.
 

Ranchi: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की सदस्य आशा लकड़ा ने रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर झारखंड में आयोजित तीन दिवसीय जनसुनवाई की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि आयोग ने राज्य के 10 जिलों से जुड़े कुल 66 मामलों की सुनवाई की, जिनमें आदिवासियों की जमीन, सेवा विवाद, चिकित्सा लापरवाही और पुलिस की भूमिका जैसे गंभीर मुद्दे शामिल थे.

 

प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में आयोग के साथ कानूनी सलाहकार राहुल यादव और अन्वेषक रिया राजपूत भी मौजूद रही. लोहरदगा, रांची, खूंटी और सरायकेला-खरसावां सहित कई जिलों के मामलों में सुनवाई करते हुए कुछ मामलों का मौके पर ही समाधान भी किया गया.

 

आशा लकड़ा ने कहा कि झारखंड में आदिवासियों की जमीन से जुड़े मामलों में छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) के उल्लंघन के कई गंभीर मामले सामने आए हैं. कांके के चामा गांव में दबाव बनाकर जमीन हस्तांतरण के छह मामलों पर आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को एफआईआर दर्ज करने, वारंट जारी करने और जल्द चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया है. साथ ही पीड़ितों की सुरक्षा के लिए उस क्षेत्र में पुलिस चौकी स्थापित करने की सिफारिश भी की गई है.

 

रांची स्थित हरमू हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर के मामले में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई है. आयोग ने पाया कि भवन निर्माण में नियमों का उल्लंघन हुआ है. इस पर रांची उपायुक्त को जमीन के मालिकाना हक की जांच कर वास्तविक मालिक की पहचान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है.

 

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी आयोग ने चिंता जताई. सरायकेला-खरसावां में एंबुलेंस की कमी के कारण एक मृत बच्चे को थैले में ले जाने की घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग को एनजीओ के साथ मिलकर एंबुलेंस सुविधा बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं.

 

अपराध के मामलों में भी आयोग सख्त नजर आया. पूर्वी सिंहभूम में नाबालिग आदिवासी लड़की के अपहरण और पुलिस की लापरवाही के मामले में संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. वहीं एक अन्य मामले में आयोग के हस्तक्षेप से पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये का मुआवजा और दोषियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की गई.

 

सेवा संबंधी मामलों में भी आयोग के हस्तक्षेप से कई लोगों को राहत मिली है. लंबित पेंशन और पीएफ भुगतान के मामले सुलझाए गए, वहीं पदोन्नति से वंचित अधिकारियों को भी न्याय मिला.

 

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में आशा लकड़ा ने बताया कि आयोग ने ओडिशा के एक मामले में भी स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जनजाति समुदाय को त्वरित न्याय दिलाना और उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है.

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