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JUT के कुलपति, कुलसचिव व निजी एजेंसी पर ई-टेंडर घोटाले और सरकारी संपत्ति गबन के आरोप,  की गई शिकायत

झारखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (JUT) में ई-टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितता और सरकारी संपत्ति के गबन का मामला सामने आया है.
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झारखंड की खबरें

Ranchi : झारखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (JUT) में ई-टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितता और सरकारी संपत्ति के गबन का मामला सामने आया है. कुमार पंकज आनंद ने 9 जुलाई 2026 को राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग के मुख्य सचिव, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) समेत कई शीर्ष अधिकारियों को विस्तृत शिकायत भेजकर विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रभारी कुलसचिव तथा जमशेदपुर की निजी एजेंसी मेसर्स अथर्व एंटरप्राइजेज (M/s Atharva Enterprises) पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

 

क्या है मूल टेंडर का मामला?

शिकायत के अनुसार, विश्वविद्यालय ने 20 जनवरी 2024 को GeM पोर्टल के माध्यम से पुरानी उत्तर पुस्तिकाओं (कबाड़) की नीलामी (Forward Auction) के लिए ई-निविदा सूचना संख्या JUT-971/2022/94 जारी की थी. टेंडर दस्तावेज और फाइनेंशियल बिड (Annexure-V) के अनुसार कबाड़ उठाने के लिए केवल पांच केंद्रों को स्वीकृति दी गई थी.

 

स्वीकृत केंद्रों में शामिल थे

1. झारखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (JUT), रांची
2. राजकीय पॉलिटेक्निक (GP), रांची
3. राजकीय पॉलिटेक्निक (GP), धनबाद
4. राजकीय महिला पॉलिटेक्निक (GWP), जमशेदपुर
5. अल-कबीर पॉलिटेक्निक

टेंडर में न्यूनतम दर 21,000 रुपये प्रति मीट्रिक टन निर्धारित की गई थी.

 

क्या हैं आरोप?

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 12 अगस्त 2024 को प्रभारी कुलसचिव द्वारा डिलीवरी आदेश संख्या JUT-971/2022/952 जारी किया गया. आरोप है कि इस आदेश में मूल ई-टेंडर की शर्तों का उल्लंघन करते हुए राजकीय पॉलिटेक्निक, कोडरमा का नाम छठे केंद्र के रूप में जोड़ दिया गया, जबकि यह केंद्र मूल निविदा प्रक्रिया का हिस्सा नहीं था.

शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद मेसर्स अथर्व एंटरप्राइजेज को कोडरमा से भी पुरानी उत्तर पुस्तिकाएं उठाने का निर्देश दिया गया. शिकायत में इसे सरकारी संपत्ति की चोरी, कूटरचना (Forgery) और ई-टेंडर प्रक्रिया का उल्लंघन बताया गया है.

 

भुगतान पर भी सवाल

शिकायत में दावा किया गया है कि टेंडर प्रक्रिया से बाहर के केंद्र से सामग्री उठाने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मेसर्स अथर्व एंटरप्राइजेज को उसका भुगतान भी कर दिया. शिकायतकर्ता का आरोप है कि ऐसा कर विश्वविद्यालय के राजस्व और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया गया.

 

शिकायत में की गई प्रमुख मांगें

शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए निम्नलिखित कार्रवाई की मांग की है—

मूल GeM वित्तीय निविदा, विश्वविद्यालय के बैंक खातों, लेजर बुक, भुगतान वाउचर व संबंधित दस्तावेजों की विभागीय जांच अथवा फॉरेंसिक ऑडिट कराई जाए.
कथित अवैध भुगतान की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए.

 

पद के दुरुपयोग, सरकारी दस्तावेजों में कथित हेरफेर और गबन के आरोपों को देखते हुए कुलपति, प्रभारी कुलसचिव तथा संबंधित एजेंसी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए.

 

मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी जैसे निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau), आर्थिक अपराध शाखा (EOW) अथवा अन्य सक्षम जांच एजेंसी को सौंपी जाए.

 

यदि वित्तीय अनियमितता सिद्ध होती है तो सरकारी राजस्व की पूरी वसूली सुनिश्चित की जाए.

 

शिकायत में यह भी कहा गया है कि मामले की जानकारी राजभवन, मुख्यमंत्री कार्यालय तथा अन्य संबंधित विभागों को भेजी गई है और इस पर आवश्यक कार्रवाई की अपेक्षा की गई है.हालांकि, यह सभी आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए हैं. इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.

 

झारखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (JUT) या आरोपित अधिकारियों की ओर से इस मामले में फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. मामले में संबंधित प्राधिकारियों द्वारा जांच के बाद ही तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी.

 

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