Ranchi : कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रितु चौधरी ने केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण के मुद्दे पर देश की महिलाओं को गुमराह करने और जनता से झूठ बोलने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि संसद में महिला आरक्षण विधेयक के नाम पर वास्तव में परिसीमन से जुड़ा बिल लाया गया था, जिसे विपक्ष ने गिरा दिया.
रांची में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में रितु चौधरी ने कहा कि ओबीसी महिलाओं को उनकी आबादी के अनुसार आरक्षण मिलना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ओबीसी महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण की आड़ में सरकार की मंशा साफ नहीं है.
उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में विपक्ष के सहयोग से महिला आरक्षण विधेयक पारित हुआ था, लेकिन सरकार की नीयत ठीक नहीं थी. अगर सरकार गंभीर होती तो 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ही इसे लागू कर दिया जाता. उन्होंने कहा कि विधेयक के साथ जनगणना और परिसीमन की शर्तें जोड़कर इसे टाल दिया गया.
रितु चौधरी ने कहा कि ढाई साल बाद अचानक परिसीमन बिल पेश करने से यह स्पष्ट होता है कि सरकार महिला सशक्तिकरण के प्रति गंभीर नहीं है. उन्होंने प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस को बदनाम करने की कोशिश की गई और महिलाओं से झूठ बोला गया.
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा मनमाने तरीके से परिसीमन लागू करना चाहती है, जैसा कि जम्मू कश्मीर में किया गया था. उनके अनुसार वहां सीटों का असंतुलन पैदा किया गया. उन्होंने कहा कि वर्तमान में पेश परिसीमन बिल से उत्तर पूर्व, गोवा और दक्षिण भारत के राज्यों पर नकारात्मक असर पड़ता और इन राज्यों को राजनीतिक रूप से कमजोर करने की कोशिश होती.
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि 2017 में सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर महिला आरक्षण बिल लाने की मांग की थी. वहीं 2018 में राहुल गांधी ने लाखों हस्ताक्षरों के साथ इस मुद्दे को उठाया था. उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि 543 सीटों पर तुरंत महिला आरक्षण लागू किया जाए, ताकि 2029 के चुनाव में संसद में महिलाओं की संख्या बढ़कर 181 तक पहुंच सके.संवाददाता सम्मेलन में मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा, अध्यक्ष सतीश पॉल मुंजनी, सोनाल शांति और कमल ठाकुर मौजूद रहे.
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