Ranchi News: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रवक्ता अख्तर अली ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति, एक वोट और समान अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना है. ऐसे में चुनाव आयोग को स्पष्ट करना चाहिए कि SIR में सभी नागरिकों के लिए एक समान प्रक्रिया और समान समयसीमा क्यों नहीं अपनाई जा रही है.
अख्तर अली ने कहा कि दिल्ली में SIR के दौरान कई प्रमुख व्यक्तियों के नाम सत्यापन के लिए चिन्हित किए जाने की मीडिया रिपोर्ट सामने आई हैं. इनमें पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, एल.के. आडवाणी और अरविंद केजरीवाल सहित अन्य नामों का उल्लेख किया गया है.
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उन्होंने कहा कि यदि पूर्व मुख्य न्यायाधीशों के परिवार के सदस्यों, पूर्व सेना प्रमुखों और अन्य प्रतिष्ठित नागरिकों के नाम भी तकनीकी या तार्किक कारणों से सत्यापन के लिए चिन्हित हो सकते हैं, तो सामान्य गरीब, मजदूर, आदिवासी और ग्रामीण मतदाताओं के लिए यह प्रक्रिया कितनी कठिन होगी, यह बड़ा सवाल है.
अख्तर अली ने उत्तर प्रदेश का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि यदि वहां छूटे हुए नामों को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा सकता है, तो बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड में भी उतनी ही सक्रियता, पारदर्शिता और घर-घर सहायता क्यों सुनिश्चित नहीं की जा रही है.
उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि झारखंड में SIR से संबंधित हर deletion का कारण, संबंधित ERO का आदेश, नोटिस की स्थिति, दावे-आपत्तियों की संख्या और अंतिम निर्णय सार्वजनिक पोर्टल पर विधानसभा और बूथ स्तर तक उपलब्ध कराया जाए. साथ ही किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले वास्तविक मानवीय सत्यापन और पर्याप्त सुनवाई सुनिश्चित करने की मांग की.
अख्तर अली ने कहा कि सवाल किसी एक व्यक्ति, पार्टी या चुनाव का नहीं, बल्कि हर नागरिक के वोट की बराबर कीमत और लोकतंत्र में उसके भरोसे का है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को अपने कार्यों के माध्यम से यह भरोसा कायम करना होगा कि SIR में गरीब और प्रभावशाली व्यक्ति के लिए एक ही नियम, एक ही प्रक्रिया और एक ही न्याय लागू हो.
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