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खनिज पर अधिकार की लड़ाई में झारखंड के साथ खड़ी होगी कांग्रेस, 27 अगस्त से आंदोलन का ऐलान

Ranchi News: प्रेस वार्ता में सुबोधकांत सहाय ने कहा कि झारखंड को खनिज से सेस और रॉयल्टी के जरिए करीब 14 हजार करोड़ रुपये की आय होती है. यह राशि राज्य के बजट और विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नजर इस राजस्व पर है.
 

Ranchi News: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने एमएमआरडी कानून में हुए बदलाव को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि नए कानून से झारखंड के खनिज और राज्य के अधिकारों पर असर पड़ेगा. कांग्रेस ने इसके खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है.

 

प्रेस वार्ता में सुबोधकांत सहाय ने कहा कि झारखंड को खनिज से सेस और रॉयल्टी के जरिए करीब 14 हजार करोड़ रुपये की आय होती है. यह राशि राज्य के बजट और विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नजर इस राजस्व पर है.

 

सहाय ने कहा कि 2024 में सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ ने राज्यों के खनिज अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया था. कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार ने इस फैसले के प्रभाव को कम करने के लिए कानून में बदलाव किया है.

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उन्होंने झारखंड के करीब 1.38 लाख करोड़ रुपये के पुराने बकाये का भी मुद्दा उठाया. सहाय ने कहा कि यह सिर्फ पैसों का मामला नहीं है, बल्कि राज्य के अधिकार और संघीय व्यवस्था से जुड़ा सवाल है.

 

आदिवासी अधिकारों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नए बदलाव का असर पेसा कानून और पांचवीं अनुसूची के तहत मिलने वाले अधिकारों पर भी पड़ सकता है. उनका कहना था कि जल, जंगल, जमीन और खनिज से जुड़े फैसलों में स्थानीय लोगों की भूमिका बनी रहनी चाहिए.

 

सुबोधकांत सहाय ने आरोप लगाया कि नए कानून से राज्य सरकार और पुलिस के अधिकार भी कमजोर हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि अगर राज्यों के अधिकार लगातार कम किए गए तो चुनी हुई राज्य सरकार की भूमिका सीमित रह जाएगी.

 

उन्होंने भाजपा के सांसदों से भी सवाल किया कि क्या वे झारखंड के हित में इस मुद्दे पर राज्य के साथ खड़े होंगे. सहाय ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक सरकार या पार्टी की नहीं, बल्कि झारखंड के लोगों के अधिकारों की लड़ाई है. उन्होंने कहा कि खनिज हमारा, जमीन हमारी, लेकिन फैसला दिल्ली का, यह बर्दाश्त नहीं होगा.

 

कांग्रेस ने इस मुद्दे पर आंदोलन का कार्यक्रम भी जारी किया है. 27 अगस्त को सभी जिलों में धरना और प्रदर्शन किया जाएगा. इसके बाद 6 से 9 सितंबर तक प्रखंड स्तर पर लोगों के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन होगा. वहीं 7 सितंबर को राज्य स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा.

 

सुबोधकांत सहाय ने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर संबंध संघीय व्यवस्था की पहचान हैं. लेकिन केंद्र सरकार का मौजूदा रवैया राज्यों के अधिकारों को कमजोर करने वाला है. कांग्रेस इसका विरोध सड़क से लेकर हर स्तर पर करेगी.

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