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कांग्रेस का मोदी पर तंज, प्रधानमंत्री का झूठ सबसे मजबूत... सीमांचल-भागलपुर की जनता वोट की चोट से जवाब देगी

रमेश ने लिखा, एशियन डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट (ADRI) की रिपोर्ट भी सीमांचल की असलियत बताती है. अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार में 73% घरों के पास नल या हैंडपंप नहीं है. 33% परिवार खुले में शौच करते हैं.  65% परिवार लकड़ी से चूल्हा जलाते हैं. फेफड़ों के रोगों का खतरा बढ़ गया है.
 

New Delhi :  कांग्रेस ने पीएम मोदी के बिहार के चुनावी दौरे पर निशाना साधा है. कांग्रेस सांसद व प्रवक्ता जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट कर तंज कहा.  प्रधानमंत्री का झूठ सबसे मज़बूत!! जयराम रमेश ने लिखा, आज प्रधानमंत्री भागलपुर और सीमांचल में आ रहे हैं.  इस अवसर पर हम उनके कुछ पिछले झूठे वादे याद दिलाना चाहते हैं और उनसे कुछ सीधा सवाल है.

 

 

2015 में प्रधानमंत्री ने कहा था,  भागलपुर में 500 एकड़ में 500 करोड़ से विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाऊंगा. 10 साल बाद  एक ईंट तक नहीं रखी गया. पूछा कि क्या विक्रमशिला भी सवा लाख करोड़ वाले पैकेज के साथ हवा में उड़ गया? इस बार सीमांचल और भागलपुर की जनता अपने वोट की चोट से NDA को हराकर इस उपेक्षा का जवाब देगी. 

 


रमेश ने लिखा, 2014 में प्रधानमंत्री ने मोतिहारी चीनी मिल के बारे में कहा था, अगली बार आऊंगा तो इसी मिल की चीनी से बनी चाय पियूंगा. 11 साल बीत गये.अभी भी लोग चाय पीने का इंतजार कर रहे हैं. प्रधानमंत्री ने मोतिहारी के लोगों से इतना बड़ा झूठ क्यों बोला था?  लिखा कि 2020 में दरभंगा AIIMS के लिए 1,264 करोड़ का वादा किया गया.  आज तक न भवन बना, न अस्पताल शुरू हुआ.  

 

इस बीच 2023 में प्रधानमंत्री ने दरभंगा AIIMS को चालू होने का दावा भी कर दिया.  क्या दरभंगा AIIMS घोषणा-पत्र से बाहर निकलकर कभी हकीकत बनेगा?   जयराम रमेश ने लिखा कि सीमांचल में गरीबी और बदहाली अपने चरम पर है.  नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार अररिया की 52% आबादी,  पूर्णिया की 50% आबादी, किशनगंज-कटिहार की 45% से अधिक आबादी आज भी बहुआयामी गरीबी से जूझ रही है.

 

उन्होंने आरोप लगाया कि  बीस साल की भाजपा-जदयू सरकार में सीमांचल की सिर्फ अनदेखी हुई है.  नतीजा यहां की लगभग आधी आबादी भयंकर गरीबी की चपेट में है.  डबल इंजन की सरकार में सीमांचल को उपेक्षा क्यों हुई और इस इलाके को इतना बदहाल क्यों छोड़ दिया गया?  

 

 रमेश ने लिखा, एशियन डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट (ADRI) की रिपोर्ट भी सीमांचल की असलियत बताती है. अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार में 73% घरों के पास नल या हैंडपंप नहीं है. 33% परिवार खुले में शौच करते हैं.  65% परिवार लकड़ी से चूल्हा जलाते हैं. फेफड़ों के रोगों का खतरा बढ़ गया है.

 

 84% परिवारों में  भयंकर गरीबी है. अधिकांश घर कृषि पर निर्भर हैं, लेकिन 40% से अधिक भूमिहीन हैं.  ट्रबल इंजन की सरकार में इस पूरे क्षेत्र को विकास से दूर क्यों रखा गया और इस पूरे क्षेत्र को जानबूझकर पिछड़ेपन में क्यों छोड़ दिया गया?   

 

 

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