Ranchi : झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (JSCA) के मौजूदा और पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका (कंटेम्प्ट पिटीशन) दायर की गई है. जमशेदपुर के सोनारी निवासी नंदू पटेल ने यह याचिका 9 जुलाई 2026 को अधिवक्ता शांतनु सागर के माध्यम से दाखिल की, जो 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में डायरी नंबर 40273/2026 के तहत दर्ज हुई.
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याचिका बीसीसीआई बनाम क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार मामले (सिविल अपील संख्या 4235/2014) में सुप्रीम कोर्ट के 18 जुलाई 2016, 7 अक्टूबर 2016, 9 अगस्त 2018 और 14 सितंबर 2022 के आदेशों की अवहेलना को लेकर दाखिल की गई है. इन आदेशों में सभी राज्य क्रिकेट संघों को लोढ़ा समिति की सिफारिशों के अनुरूप अपना संविधान संशोधित कर पंजीकृत कराने का निर्देश दिया गया था.
याचिकाकर्ता का आरोप है कि JSCA ने 23 सितंबर 2018 की विशेष आम सभा के बाद से संशोधित संविधान का अब तक पंजीकरण नहीं कराया, बावजूद इसके 22 सितंबर 2019, 1 मई 2022 और 18 मई 2025 को बिना पंजीकृत संविधान के चुनाव कराए गए. याचिका में यह भी कहा गया है कि इन चुनावों में फर्जी और अपात्र मतदाताओं की भागीदारी हुई और हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) संबंधी नियमों की अनदेखी की गई.
इस मामले में JSCA के मानद सचिव सौरभ तिवारी, अध्यक्ष अजयनाथ शाहदेव, कोषाध्यक्ष अमिताव घोष सहित बीसीसीआई के मानद सचिव देवजीत सैकिया और कई पूर्व पदाधिकारियों को अभियुक्त बनाया गया है, कुल दस प्रतिवादी हैं.
याचिकाकर्ता ने पहले भी 24 जून 2025 को झारखंड हाईकोर्ट में और 14 अक्टूबर 2025 को बीसीसीआई ओम्बड्समैन-सह-एथिक्स ऑफिसर के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर 30 मार्च 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ था, परंतु संतोषजनक जवाब नहीं मिला. अब मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.
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