Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

संविदा कर्मियों के नियमितीकरण से संबंधित अवमानना याचिका हाईकोर्ट से ड्रॉप

झारखंड हाईकोर्ट में 10 साल से अधिक सेवा देने वाले संविदा कर्मियों के नियमितीकरण से जुड़े मामले में रंजीत कुमार की अवमानना याचिका की सुनवाई हुई.
Advertisement
Advertisement
  • उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के प्रधान सचिव हुए हाजिर

Ranchi :  झारखंड हाईकोर्ट में 10 साल से अधिक सेवा देने वाले संविदा कर्मियों के नियमितीकरण से जुड़े मामले में रंजीत कुमार की अवमानना याचिका की सुनवाई हुई.

 

सुनवाई के दौरान कोर्ट के आदेश के आलोक में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव कोर्ट में हाजिर हुए. हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति आनंदा सेन की कोर्ट ने सरकार का पक्ष जानने के बाद अवमानना याचिका समाप्त (ड्रॉप) कर दी. 

 

दरअसल, कोर्ट ने इससे संबंधित रंजीत कुमार की रिट याचिका में 15 जनवरी 2024 को पारित आदेश का अब तक अनुपालन नहीं होने पर प्रधान सचिव को अवमानना नोटिस जारी किया था. साथ ही उनसे पूछा था कि उनके विरुद्ध आदेश की अवहेलना के लिए आरोप तय क्यों न किया जाए.

 

संविदा कर्मियों के नियमितीकरण पर हुआ था आदेश पारित 

उल्लेखनीय है कि 15 जनवरी 2024 को हाईकोर्ट ने प्रार्थी सहित कई रिट याचिकाओं पर फैसला सुनाया था. यह मामला राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, विश्वविद्यालयों और संस्थानों में वर्षों से कार्यरत संविदा, अस्थायी और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण (Regularization) से जुड़ा था.

 

 हाई कोर्ट के तत्कालीन न्यायमूर्ति डॉ. एस.एन. पाठक ने अपने आदेश में कहा था कि राज्य सरकार द्वारा वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों की सेवाएं लेने के बावजूद उनके नियमितीकरण से इनकार करना अनुचित और मनमाना है.

 

कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि जो कर्मचारी 10 वर्षों या उससे अधिक समय से बिना किसी शिकायत या अनुशासनात्मक कार्रवाई के लगातार सेवा दे रहे हैं, उनके मामलों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए.

 

कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकार ने नियमितीकरण के बजाय आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्तियों को जारी रखा, जो कानून के उद्देश्य के विरुद्ध है. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि प्रत्येक कर्मचारी के मामले की व्यक्तिगत जांच की जाए. यदि कोई कानूनी बाधा नहीं हो तो नियमितीकरण पर आदेश पारित किया जाए.

 

कोर्ट ने सरकार को 16 सप्ताह के भीतर यह प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने यह भी कहा था कि जो कर्मचारी याचिका लंबित रहने के दौरान सेवानिवृत्त हो चुके हैं, यदि उन्होंने 10 वर्षों से अधिक सेवा दी है तो उन्हें भी पूर्व प्रभाव से नियमितीकरण एवं सभी परिणामी लाभ दिए जाएं. 

 

कोर्ट ने आदेश दिया था कि सरकार एक उच्च स्तरीय समिति (High Powered Committee) गठित करे, जो नियमितीकरण संबंधी मामलों को देखे, ताकि बार-बार अदालत में मुकदमेबाजी न हो.

 

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही