- करीब 2 एकड़ जमीन के रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर खोली गई थी जमाबंदी
Ranchi News : नामकुम अंचल में जमीन के म्यूटेशन से जुड़े दस्तावेजों में कथित छेड़छाड़ के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्राथमिकी दर्ज कर लगातार छापेमारी अभियान चला रही है. मामले में तत्कालीन अंचलाधिकारी (CO) श्वेता वर्मा, तत्कालीन अंचल निरीक्षक मनोज कुमार और तत्कालीन अंचल निरीक्षक दीपक कुमार को आरोपी बनाया गया है. ACB ने इस मामले में केस नंबर 18/26 दर्ज किया है. हालांकि CO श्वेता वर्मा और प्रकाश कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के मालिक भी फरार बताए जा रहे है.
मामला जिसमें धुर्वा थाना क्षेत्र के डुंडू गांव स्थित खाता नंबर 32, प्लॉट नंबर 776, 820, 821 और 822 की करीब 2 एकड़ जमीन से जुड़े रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ का आरोप है. आरोप है कि अंचल स्तर पर रिकॉर्ड में हेरफेर कर प्रकाश कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के नाम जमाबंदी कायम कर दी गई. शिकायत में करीब दो एकड़ जमीन के म्यूटेशन और डिमांड खोले जाने को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
5.93 एकड़ जमीन की खरीद, बाद में सामने आया विवाद
शिकायत के अनुसार, परिवादी की मां ने तीन अलग-अलग पंजीकृत विक्रय विलेखों के माध्यम से कुल 5.93 एकड़ जमीन खरीदी थी. इसका पंजीकरण संख्या 23R/1978-79 बताया गया है. मां की मृत्यु के बाद परिवार में बंटवारा हुआ और परिवादी जमीन का वैध उत्तराधिकारी बना.
17 अगस्त 2016 को परिवादी को अंचल कार्यालय की ओर से दोहरी जमाबंदी को लेकर नोटिस मिला. इसके बाद अंचल कार्यालय पहुंचने पर पता चला कि संबंधित जमीन के हिस्से पर प्रकाश कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के नाम नई जमाबंदी कायम कर दी गई है.
हाईकोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुई FIR
मामले में शिकायत और न्यायिक प्रक्रिया के बाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में ACB ने FIR दर्ज की है. FIR दर्ज होने के बाद अब जांच एजेंसी ने कार्रवाई तेज कर दी है. ACB की टीम आरोपियों और मामले से जुड़े लोगों के संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है.
तत्कालीन CO और कंपनी मालिक फरार
FIR दर्ज होने के बाद तत्कालीन CO श्वेता वर्मा फरार बताई जा रही हैं. उनका मोबाइल फोन भी बंद बताया जा रहा है. वहीं, जमीन के मामले में नाम सामने आने वाली प्रकाश कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के मालिक के भी फरार होने की सूचना है. दोनों की तलाश में ACB की टीम लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है.
जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि अंचल कार्यालय के रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ किस स्तर पर हुई और करीब दो एकड़ जमीन का म्यूटेशन और डिमांड कंपनी के नाम खोलने की प्रक्रिया में तत्कालीन CO और अन्य अधिकारियों की क्या भूमिका थी.


