Ranchi: रांची के सदर अस्पताल में एक हाई रिस्क गर्भवती महिला के सिजेरियन ऑपरेशन के बाद हुई मौत को लेकर चिकित्सकों और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के बीच गंभीर विवाद सामने आया है. झारखंड राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ यानी झासा ने इस पूरे घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए सीएचओ सोनी प्रसाद सहित अन्य पर कार्रवाई की मांग की है.
जानकारी के अनुसार, 21 जनवरी 2026 को एक हाई रिस्क गर्भवती महिला को सदर अस्पताल रांची में भर्ती किया गया था. मरीज और उसके परिजनों को ऑपरेशन से जुड़े सभी संभावित खतरों की जानकारी दी गई थी और इनफॉर्म्ड कंसेंट और हाई रिस्क बॉन्ड लेने के बाद सिजेरियन ऑपरेशन किया गया. यह ऑपरेशन दो सीनियर स्त्री रोग विशेषज्ञ, चार एनेस्थिटिस्ट और एक यूरो सर्जन की टीम द्वारा किया गया.
ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति को देखते हुए उसे रिम्स रांची रेफर किया गया. रेफरल के दौरान ही रिम्स से लगातार संपर्क स्थापित किया गया और ट्रॉमा सेंटर आईसीयू में पहले से व्यवस्था सुनिश्चित कर ली गई थी.
मरीज के पहुंचते ही विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा इलाज शुरू किया गया. रिम्स में इलाज के दौरान बिना किसी डोनेशन के निशुल्क ब्लड और ब्लड कंपोनेंट की लगातार व्यवस्था की गई. इसके बावजूद तीन दिन बाद मरीज की मौत हो गई.
चिकित्सकों का आरोप है कि इलाज के दौरान और मरीज की मृत्यु के बाद सीएचओ सोनी प्रसाद और अन्य लगभग दस सीएचओ द्वारा रिम्स और सदर अस्पताल में लगातार आकर हंगामा किया गया. इस दौरान सरकारी कार्य में बाधा डाली गई और सोशल मीडिया के माध्यम से चिकित्सकों और सदर अस्पताल रांची की छवि खराब करने का प्रयास किया गया.
इस घटना को लेकर झासा की एक आपात बैठक आयोजित की गई, जिसमें चिकित्सकों ने एक स्वर में इस पूरे घटनाक्रम की निंदा की. बैठक में कहा गया कि इस तरह की घटनाओं से चिकित्सकों का मनोबल टूटता है और इसका सीधा असर मरीजों की देखभाल पर पड़ता है. चिकित्सकों ने यह भी कहा कि ऐसे माहौल में गंभीर बीमारी वाले मरीजों को रेफर करने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है, जो स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चिंताजनक है.
चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि प्लेसेंटा परकृटा जैसे मामलों के ऑपरेशन अत्यंत जटिल और जोखिम भरे होते हैं. इसके बावजूद सदर अस्पताल और रिम्स के चिकित्सकों द्वारा उच्चतम स्तर का इलाज और सर्वोत्तम प्रयास किया गया. मरीज की जान बचाने के लिए सभी आवश्यक चिकित्सकीय संसाधनों का उपयोग किया गया.
झासा ने सिविल सर्जन रांची से मांग की है कि चिकित्सकों की छवि धूमिल करने, अस्पताल परिसर में हंगामा करने और सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करने के आरोप में सीएचओ सोनी प्रसाद सहित अन्य सभी संबंधित सीएचओ पर अविलंब कार्रवाई की जाए.
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो झासा के चिकित्सक किसी भी स्तर का आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला स्वास्थ्य प्रशासन की होगी.
इस बैठक में डॉक्टर एस प्रसाद, अध्यक्ष डॉ विमलेश सिंह, सचिव डॉक्टर ठाकुर मृत्युंजय कुमार सिंह, फीमेल विंग की वाइस प्रेसिडेंट डॉक्टर मुशरत यामिनी, डॉ आर के सिंह, डॉ ए के झा, डॉ रंजू सिन्हा, डॉक्टर वसुधा, डॉ नीरज, डॉक्टर अनीता, डॉक्टर श्वेता लाल, डॉक्टर समीरन कमल, डॉक्टर वंदिता, डॉक्टर आर के जायसवाल, डॉ किरण चंदेल, डॉ मुजफ्फर, डॉक्टर शिल्पी, डॉक्टर नंदिनी सहित कई अन्य चिकित्सक उपस्थित थे.
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