Ranchi : सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम और संजीव लाल को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है. न्यायाधीश एम. एम. सुंदरेश और न्यायाधीश एन. कोटेश्वर सिंह की पीठ में दोनों की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई.
सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से कहा गया कि मामला अत्याधिक गंभीर है. कमीशनखोरी और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित है. न्यायालय के आदेश के आलोक में अब तक चारों गवाहों के बयान दर्ज करने की कार्रवाई पूरी नहीं हुई है.
आलमगीर आलम की ओर से कहा गया कि वह 77 साल के है. दो साल से अधिक समय से जेल में हैं. न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आलमगारी आलम को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया. न्यायालय ने संजीव लाल को भी जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया.
ईडी ने गवाहों को प्रभावित करने की जताई थी आशंका
पिछली सुनवाई, जो 2 अप्रैल को हुई थी, में भी ईडी ने दोनों की जमानत याचिकाओं का विरोध किया था. ईडी की ओर से सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी गयी थी कि ट्रायल कोर्ट द्वारा चार गवाहों के बयान दर्ज करना बाकी है, इसलिए अभियुक्तों को जमानत पर रिहा नहीं किया जाना चाहिए. जमानत पर रिहा होने से गवाहों को प्रभावित किये जाने की आशंका है.
जबकि आलमगीर आलम की ओर से यह कहा गया था कि उनकी उम्र 77 साल है. वह बीमार हैं. उनके पास के कोई सामान या पैसा बरामद नहीं हुआ है. इसलिए उन्हें ज़मानत पर रिहा कर दिया जाना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद ट्रायल कोर्ट को चारों महत्वपूर्ण गवाहों का बयान एक महीने के अंदर दर्ज करने का निर्देश दिया था. गवाहों में मुन्ना सिंह, संतोष कुमार उर्फ रिंकू, स्वर्णजीत सिंह गिल (संपत्ति विक्रेता) और बिंदेश्वर राम (संपत्ति विक्रेता) का नाम शामिल है.
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को दिये गये इस निर्देश के साथ ही दोनों जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के लिए एक महीने बाद की तिथि निर्धारित करने का निर्देश दिया था. इसके आलोक में 11 मई यानी आज इन जमानत याचिकाओं पर सुनवाई की तिथि निर्धारित की गयी.
क्या है मामला
गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छह मई 2024 को संजीव लाल, जहांगीर आलम सहित अन्य के ठिकानों पर छापा मारा था. छापामारी के दौरान जहांगीर के ठिकाने से 32.20 करोड़ रुपये नकद जब्त किये गये थे.
वहीं संजीव लाल के घर से 10.05 लाख रुपये नकद के अलावा एक डायरी मिली थी. इसमें कमीशन की रकम की हिस्सेदारी का हिसाब किताब लिखा था. कमीशन की रकम में हिस्सा लेने वालों के नाम के लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल किया गया था.
छापेमारी के दौरान मिली नकद राशि और दस्तावेज के आधार पर 7 मई 2024 को मंत्री के आप्त सचिव संजीव लाल और उसके करीबी जहांगीर आलम को सात मई 2024 को गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद तत्कालीन विकास मंत्री आलमगीर आलम को पूछताछ के लिए समन जारी किया गया था.
दो दिनों की लंबी पूछताछ के बाद ईडी ने 15 मई की देर रात मंत्री को गिरफ्तार किया था. अब तक की जांच के दौरान ईडी संजीव लाल की 4.42 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर चुकी है. वहीं जहांगीर आलम के घर से मिली 32.20 करोड़ रुपये की नकद राशि भी जब्त की गई है. सबसे ज्यादा तत्कालीन मुख्य अभियंता विरेंद्र राम की 39 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गयी है.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें


Leave a Comment