Ranchi : पुलिस मुखबिर के आरोप में भुषण कुमार सिंह और राम गोबिंद की हत्या मामले में सजायफ्ता नक्सली जेठा कच्छप और पूर्व विधायक पौलूस सुरीन की ओर से सजा के खिलाफ दाखिल क्रिमिनल अपील पर झारखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने इन दोनों की याचिका को स्वीकार कर लिया है और उन्हें बरी कर दिया है.
पूर्व में मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. दोनों ने निचली अदालत द्वारा दिए गए आजीवन कारावास की सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और उसे रद्द करने का आग्रह किया था. पौलूस सुरीन की ओर से वरीय अधिवक्ता बीएम त्रिपाठी और अधिवक्ता नवीन कुमार जायसवाल ने पक्ष रखा. जेठा कच्छप की ओर से मनोज चौबे ने दलील दी.
दरअसल, अपर न्याययुक्त दिनेश कुमार की कोर्ट ने नक्सली जेठा कच्छप और पौलूस सुरीन को दोहरे हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. अदालत ने जेठा कच्छप पर 45 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था. साथ ही जुर्माना की राशि नहीं देने पर 1 साल की अतिरिक्त सजा भुगतने का निर्देश दिया था.
क्या था मामला
साल 2013 में खूंटी के तोरपा में पुलिस मुखबिर भुषण सिंह और राम गोविंद की हत्या कर दी गई थी. अपराधियों ने दोनों की घर के सामने चबूतरे में अंधाधुंध फायरिंग की थी, जिससे दोनों की मौत हो गई थी. इस मामले में कर्रा थाना में कांड संख्या 27/ 2013 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी.
मामले में पौलूस सुरीन, नक्सली जेठा कच्छप, कृष्णा महतो, 3 महिला समेत 6 आरोपी ट्रायल फेस कर रहे थे. इसी मामले में पीएफएलआई सुप्रीमो दिनेश गोप भी ट्रायल फेस रहे हैं. अभियोजन पक्ष की ओर से 12 गवाह पेश किए गए थे. जबकि बचाव पक्ष की ओर से 1 गवाह पेश किया गया था.
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