Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट में हिरासत में कथित यातना और मौत के मामले में दायर शाईदा खातून एवं अन्य अवमानना याचिका की सुनवाई हुई. MMCH मेदिनीनगर के सुपरीटेंडेंट ऑफ मेडिसिन, डिप्टी सुपरीटेंडेंट और ड्यूटी डॉक्टर को ड्यूटी रजिस्टर के साथ हाजिर होने को कहा है. अगली सुनवाई 11 मई को होगी. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता शादाब इकबाल और अधिवक्ता आयुष राज ने पैरवी की.
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की. खंडपीठ ने MMCH मेदिनीनगर के उक्त तीनों डॉक्टर से वह दस्तावेज मांगा है जो सीजीएम कोर्ट में जमा होने के बाद जिसकी फोटो कॉपी में मृतक युवक की इंज्यूरी बाद में लिखी गई है. आज सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष यह बात आई की 1 मार्च से 4 मार्च 2025 तक पुलिस ने युवक की जमकर पिटाई की, इसके बाद 4 मार्च को मारपीट को छुपाने के लिए उसका कुछ मेडिकल ट्रीटमेंट हुआ था.
बाद में उसकी तिथि में हेरा फेरी की गई और बाद में 7 मार्च की रात में रिम्स में उसे भर्ती किया गया था. इससे पहले 6 मार्च को सीजेएम कोर्ट में उसे प्रस्तुत कर पुलिस ने रिमांड पर लिया था. जिसमें उसे फिट का कस्टडी दिखाया गया था. बाद में लेटर ऑन करके उसी दिन एक और आर्डर आया है जिसमें सीजेएम पलामू ने मृतक को मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए रेफर किया लेकिन हाईकोर्ट की खंडपीठ ने प्रथम दृष्टि से यह माना की दोनों ऑर्डर (सीजेएम ने जिस ऑर्डर में फिट का कस्टडी दर्शाया है और लेटर ऑन करके एक बाद का आर्डर) के बीच में गैप है.
अनुसंधानकर्ता ने ऐसा कोई दस्तावेज सीजेएम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जिससे यह साबित होती है की सीजेएम पलामू द्वारा युवक को फिर से मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए भेजा जाए. जब एक बार रिमांड हो गया तो फिर से सीजेएम के पास मृतक युवक को प्रस्तुत करने की क्या जरूरत थी? इस विषय को कोर्ट ने गंभीरता से लिया है और सीजीएम पलामू के एलसीआर में जो डिस्चार्ज समरी अनुसंधानकर्ता ने लगाया है उसमें 4 तारीख को बदलकर 7 तारीख बनाया गया.
हिरासत में मारपीट से हुई थी युवक की मौत
प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता शादाब इकबाल व अधिवक्ता आयुष राज ने कोर्ट को बताया था कि 1 मार्च 2025 को युवक महफूज अहमद को नवाबाजार से पुलिस पकड़ कर ले गई थी. हिरासत में लेकर उसके साथ मारपीट की गई. बाद में उसके खिलाफ पांकी थाना कांड संख्या 25 /2025 दर्ज कर सीजेएम कोर्ट पलामू में पेश कर रिमांड पर लिया गया. उस दौरान सीजेएम कोर्ट में पुलिस ने अस्पताल का एक सर्टिफिकेट भी प्रस्तुत किया था, जिसमें युवक के घायल होने के बावजूद भी उसे फिट फॉर कस्टडी बताया गया था.
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